रांची में झारखंड हाईकोर्ट ने फूड सेफ्टी ऑफिसर भर्ती प्रक्रिया रद्द करने से संबंधित राज्य सरकार की अधिसूचना के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि नियमित नियुक्ति को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना समाप्त नहीं किया जा सकता।
यह मामला राधिका कुमारी और एक अन्य अभ्यर्थी की याचिका पर अदालत के समक्ष पहुंचा। याचिका में 18 अगस्त को जारी उस अधिसूचना को चुनौती दी गई है, जिसके माध्यम से फूड सेफ्टी ऑफिसर की पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द कर दी गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उनकी नियुक्ति संबंधित विज्ञापन के तहत विधिवत हुई थी, लेकिन प्रक्रिया रद्द होने से उनकी सेवाएं भी समाप्त हो गईं।
अदालत ने इसी क्रम में जेएसएससी सीजीएल के विज्ञापन संख्या 10/2023 के तहत हुई नियुक्तियों को रद्द करने वाले सरकारी आदेश के संचालन और अनुपालन पर भी अगले आदेश तक रोक लगाई है। यह आदेश शालिनी सुंडी व अन्य, रोजलिन श्वेता तिग्गा व अन्य तथा ऋषिकेश सज्जन व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई के बाद दिया गया।
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि अधिसूचना से प्रभावित नियुक्त कर्मियों को फिलहाल काम करते रहने दिया जाए। महाधिवक्ता से संबंधित विभाग को यह निर्देश पहुंचाने को कहा गया है, ताकि याचिकाकर्ताओं के साथ समान स्थिति वाले दूसरे प्रभावित कर्मियों को भी काम जारी रखने की अनुमति मिले।
सभी याचिकाकर्ताओं को एक शपथपत्र या अंडरटेकिंग दाखिल करनी होगी। इसमें उन्हें स्वीकार करना होगा कि संबंधित आपराधिक मामले में ट्रायल कोर्ट का अंतिम आदेश उनके लिए बाध्यकारी रहेगा। इस अंतरिम व्यवस्था के बावजूद भर्ती विवाद का अंतिम निपटारा अभी बाकी है।
अदालत ने राज्य सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि सीआईडी जांच में कौन-से तथ्य सामने आने के बाद इतने बड़े स्तर पर विज्ञापनों और नियुक्तियों को रद्द करने का निर्णय लिया गया। सरकार को अपनी कार्रवाई की आवश्यकता और उसके ठोस आधार जवाबी शपथपत्र में बताने होंगे।