धनबाद जिले के बलियापुर प्रखंड की घड़बड़ पंचायत और आसपास के छह गांवों में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में नई पहल शुरू हुई है। केंद्रीयकृत जल उपचार संयंत्र और एकल वितरण केंद्र के संचालन के लिए सक्षम एजेंसी के चयन की प्रक्रिया चल रही है। प्रस्तावित व्यवस्था से घड़बड़, खरिकाबाद, कालाझोर, शिवपुर, कालीपुर और सिंपथार के लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
जिला योजना शाखा ने संयंत्र तथा वितरण केंद्र चलाने के लिए एजेंसी चयन की निविदा जारी की है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एजेंसी नहीं होने के कारण संयंत्र बंद था और नियमित जलापूर्ति नहीं हो पा रही थी। एजेंसी के चयन और संचालन संबंधी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही पानी की नियमित आपूर्ति शुरू होने का समय स्पष्ट हो सकेगा।
जून 2026 में वैज्ञानिक शोध पत्रिका एसीएस ईएस एंड टी वाटर में प्रकाशित अध्ययन में क्षेत्र के 315 भूजल नमूनों की जांच का विवरण दिया गया था। अध्ययन के मुताबिक, 36 प्रतिशत से अधिक नमूनों में फ्लोराइड का स्तर 1.5 मिलीग्राम प्रति लीटर की निर्धारित सीमा से ज्यादा पाया गया। नमूनों में इसकी मात्रा 0.02 से 16.2 मिलीग्राम प्रति लीटर के बीच और औसत 1.68 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज की गई थी।
अध्ययन में शामिल छह गांवों में घड़बड़ का फ्लोराइड प्रदूषण सूचकांक सबसे अधिक बताया गया। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार इन गांवों की संयुक्त आबादी 5,982 थी, हालांकि वर्तमान जनसंख्या अलग हो सकती है। इसी पुराने आंकड़े के आधार पर करीब छह हजार लोगों तक शुद्ध पेयजल पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि चापाकल से पानी भरने के कुछ समय बाद बर्तनों में पीली परत जम जाती है और पीने तथा खाना बनाने में परेशानी होती है। हालांकि, ऐसी परत अपने आप में अधिक फ्लोराइड का प्रमाण नहीं है। पानी की वास्तविक गुणवत्ता और समस्या का कारण जानने के लिए प्रयोगशाला जांच जरूरी होगी। पंचायत में आठ चापाकल लगाए जाने की जानकारी है, जिनमें से अधिकांश के खराब होने की बात ग्रामीणों ने कही है।
नई व्यवस्था की सफलता एजेंसी चयन के साथ संयंत्र की तकनीकी क्षमता, फ्लोराइड हटाने की प्रभावशीलता, रखरखाव, नियमित गुणवत्ता जांच और वितरण केंद्र तक पानी पहुंचाने पर निर्भर करेगी। निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह सामने आएगा कि प्रभावित गांवों को उपचारित पेयजल कब से और कितनी नियमितता के साथ मिल पाएगा।