धनबाद के बलियापुर में झारखंड आंदोलन के प्रणेता और झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक बिनोद बिहारी महतो की 103वीं जयंती मनाई जा रही है। बीबीएम इंटर कॉलेज समेत विभिन्न स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में उनके विचारों, सामाजिक संघर्ष और अलग झारखंड राज्य के आंदोलन में निभाई गई भूमिका को याद किया जा रहा है।
बिनोद बिहारी महतो का जन्म 23 सितंबर 1923 को बलियापुर के बड़ादहा में हुआ था। उन्होंने अलग झारखंड राज्य की मांग से जुड़े आंदोलन को नई दिशा देने में भूमिका निभाई। उनकी जयंती पर क्षेत्र के लोग उस दौर के संघर्ष और झारखंड की अलग पहचान से जुड़े उनके प्रयासों को स्मरण कर रहे हैं।
राज्य आंदोलन के साथ ही बिनोद बिहारी महतो ने सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध भी आवाज उठाई थी। उन्होंने शिवाजी समाज का गठन कर समाज में मौजूद कुरीतियों पर प्रहार किया। उनके सार्वजनिक जीवन में सामाजिक बदलाव और शिक्षा को विशेष महत्व दिए जाने की बात भी जयंती कार्यक्रमों के दौरान सामने रखी गई।
शिक्षा के प्रसार के लिए उन्होंने कई शिक्षण संस्थान खोले थे। इसी कारण उनकी विरासत को केवल राजनीतिक आंदोलन तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि सामाजिक जागरूकता और शिक्षा से भी जोड़कर देखा जाता है। बलियापुर के बीबीएम इंटर कॉलेज में आयोजित जयंती कार्यक्रम इसी शैक्षणिक योगदान की याद भी दिलाता है।
पूर्व विधायक आनंद महतो ने कहा कि रोजगार संकट, भ्रष्टाचार और जातिप्रथा जैसे जिन मुद्दों के विरुद्ध बिनोद बिहारी महतो जीवनभर संघर्ष करते रहे, वे आज भी प्रासंगिक हैं। उनके अनुसार, बिनोद बाबू के विचार आगे भी समाज का मार्गदर्शन करते रहेंगे।
जयंती के अवसर पर हो रहे आयोजन झारखंड के राजनीतिक और सामाजिक इतिहास में बिनोद बिहारी महतो के योगदान को रेखांकित करते हैं। बलियापुर में उन्हें याद करते हुए उनके अलग राज्य आंदोलन, सामाजिक सुधार और शिक्षा के क्षेत्र में किए गए प्रयासों को प्रमुखता से सामने रखा जा रहा है।