सरायकेला के बाटीडीह गांव में आयोजित छऊ चौपाल में पारंपरिक छऊ नृत्य के संरक्षण और महिला कलाकारों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया। रजतेंदु कला निकेतन की ओर से हुए कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों ने इस नृत्य शैली के विकास, नियमित प्रशिक्षण और प्रचार-प्रसार से जुड़े विषयों पर विचार साझा किए।
चौपाल में छऊ गुरु रजतेंदु रथ और गुरु स्वीटी पटनायक ने कलाकारों के साथ पारंपरिक तकनीकों तथा गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व पर चर्चा की। कार्यक्रम में बताया गया कि सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए युवा कलाकारों को अभ्यास और प्रशिक्षण से लगातार जोड़ना जरूरी है।
कार्यक्रम का एक प्रमुख विषय छऊ नृत्य में महिलाओं की सक्रिय सहभागिता रहा। चर्चा के दौरान महिला कलाकारों के लिए बेहतर प्रशिक्षण, नियमित अभ्यास और प्रतिभा प्रदर्शित करने के अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता बताई गई। आयोजकों का मानना है कि उनकी बढ़ती भागीदारी से इस पारंपरिक कला को नई ऊर्जा मिल सकती है।
चौपाल के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाओं को पहचान और मंच देने की जरूरत भी सामने रखी गई। आयोजन का उद्देश्य गांवों में छऊ नृत्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना, स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहित करना और क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को जीवंत बनाए रखना था। संस्था ने प्रशिक्षण और संरक्षण से जुड़े प्रयास जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई।
इस अवसर पर गुरु कुसुमी पटनायक, प्रियंका महतो, अनुषा महतो, अमिश सोया, राम महतो, पूजा सोय, रानी सोय और संतोषी महतो सहित अन्य कलाकार उपस्थित रहे। प्रतिभागियों ने छऊ की परंपरा को आगे बढ़ाने में सामूहिक अभ्यास, कलाकारों के सहयोग और ग्रामीण स्तर पर अवसरों के विस्तार को महत्वपूर्ण बताया।