बीबीएमकेयू सीनेट की बैठक में प्रमुख प्रस्तावों पर चर्चा टली, 13 अक्टूबर को फिर जुटेंगे सदस्य

धनबाद में करीब छह वर्ष बाद हुई बीबीएमकेयू सीनेट की बैठक में एजेंडा पुस्तिका देर से मिलने पर सदस्यों ने आपत्ति जताई। लंबित प्रस्तावों पर अब 13 अक्टूबर को चर्चा होगी।

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धनबाद में बीबीएमकेयू सीनेट की बैठक में उपस्थित सदस्य और विश्वविद्यालय अधिकारी

धनबाद स्थित बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय की सीनेट बैठक में प्रमुख प्रस्तावों पर चर्चा पूरी नहीं हो सकी। करीब छह वर्ष के अंतराल के बाद बुधवार को आयोजित बैठक में एजेंडा पुस्तिका उपलब्ध कराने के तरीके को लेकर विधायक सदस्यों ने आपत्ति दर्ज कराई। इसके बाद शेष विषयों के लिए 13 अक्टूबर को दोबारा बैठक बुलाने का निर्णय लिया गया।

विधायक सदस्यों का कहना था कि महत्वपूर्ण प्रस्तावों वाली एजेंडा पुस्तिका उन्हें पर्याप्त समय पहले मिलनी चाहिए थी। इससे वे प्रस्तावों का अध्ययन करके बैठक में अपनी बात रख पाते। पुस्तिका पहले उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्होंने तत्काल एजेंडा पर विचार करने से इनकार कर दिया और चर्चा आगे नहीं बढ़ सकी।

बैठक में विश्वविद्यालय के आगामी दीक्षांत समारोह से संबंधित एक निर्णय जरूर लिया गया। सीनेट ने नौ अक्टूबर को समारोह आयोजित करने पर सहमति दी। इसके अतिरिक्त अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव लंबित रह गए, जिन्हें अब अगली बैठक में सदस्यों के सामने रखा जाएगा।

लंबे समय बाद सीनेट की बैठक होने का मुद्दा भी सदस्यों ने उठाया। विधायक उमाकांत रजक और सीनेट सदस्य रंजीत कुमार राय ने छह वर्षों तक बैठक नहीं बुलाए जाने पर सवाल किया। सदस्यों ने विश्वविद्यालय के महत्वपूर्ण फैसलों में सीनेट की भूमिका का उल्लेख करते हुए नियमित बैठक की आवश्यकता बताई।

सीनेट के छह विधायक सदस्यों में से पांच बैठक में उपस्थित रहे। इनमें धनबाद विधायक राज सिन्हा, टुंडी विधायक मथुरा प्रसाद महतो, सिंदरी विधायक चंद्रदेव महतो, चंदनकियारी विधायक उमाकांत रजक और जमुआ विधायक मंजू कुमारी शामिल थीं। कुलपति प्रो. राम कुमार सिंह के साथ विश्वविद्यालय के डीन, विभागाध्यक्ष, अंगीभूत कॉलेजों के प्राचार्य और राजभवन से नामित सदस्यों ने भी भाग लिया।

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, बुधवार को जिन महत्वपूर्ण विषयों पर विचार नहीं हो पाया, उन्हें 13 अक्टूबर की बैठक में लिया जाएगा। इस तरह छह वर्ष बाद शुरू हुई सीनेट की बैठक का निर्णयात्मक हिस्सा अब अगले सत्र पर निर्भर रहेगा, जबकि नौ अक्टूबर के दीक्षांत समारोह की तारीख पर सहमति बन चुकी है।