बोकारो जिले में किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के निदेशक मंडल में शामिल कई महिलाओं के नाम राशन कार्ड से हटा दिए जाने का मामला सामने आया है। इससे मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना समेत राशन कार्ड से जुड़ी दूसरी सरकारी योजनाओं का लाभ भी प्रभावित हुआ है। ये महिलाएं खेती से जुड़ी हैं और छोटे किसानों को सामूहिक रूप से संगठित करने वाले एफपीओ में निदेशक की जिम्मेदारी निभा रही हैं।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, केंद्र के निर्देश में कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय में पंजीकृत कंपनियों के निदेशकों के नाम राशन कार्ड से हटाने को कहा गया था। एफपीओ भी कंपनी अधिनियम के तहत पंजीकृत हो सकते हैं। इसी आधार पर स्थानीय आपूर्ति विभागों की कार्रवाई में उन महिला किसानों के नाम भी हट गए, जो एफपीओ की निदेशक तो हैं, लेकिन आर्थिक रूप से संपन्न नहीं हैं।
जरीडीह स्थित तेजस फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के निदेशक मंडल की चार महिला सदस्यों के नाम राशन कार्ड से हटाए जाने की बात सामने आई है। इसके बाद उनके नाम मंईयां सम्मान योजना की सूची से भी हट गए। प्रभावित महिलाओं ने बोकारो के जिला आपूर्ति पदाधिकारी को पत्र देकर अपने नाम राशन कार्ड में बनाए रखने का अनुरोध किया है।
कसमार की ग्रामीण हरित क्रांति महिला प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड से जुड़ी पांच महिला निदेशकों के भी प्रभावित होने की जानकारी दी गई है। सभी खेती-बाड़ी से जुड़ी बताई गई हैं। सरकारी लाभ रुकने से नाराज कुछ महिलाओं ने निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया है, जबकि कुछ अन्य ने पद छोड़ने की चेतावनी दी है।
मंईयां सम्मान योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार लाभार्थी महिला या उसके परिवार के पास राज्य का गुलाबी, पीला, हरा अथवा सफेद राशन कार्ड होना जरूरी है। योजना का डेटाबेस खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के राशन कार्ड पोर्टल से जुड़ा होने के कारण कार्ड से नाम हटते ही पात्रता पर सीधा असर पड़ रहा है।
मामले को देखते हुए कृषि सचिव अबु बक्कर सिद्दीख ने सभी जिलों के उपायुक्तों को पत्र लिखकर एफपीओ की महिला निदेशकों के नाम राशन कार्ड से नहीं हटाने का आग्रह किया है। खाद्य आपूर्ति सचिव राजेश शर्मा के अनुसार मामला विभाग के संज्ञान में आने पर उचित कार्रवाई की जाएगी। अब प्रभावित महिलाओं की पात्रता और एफपीओ निदेशक की भूमिका के बीच अंतर स्पष्ट करने वाली प्रशासनिक कार्रवाई पर नजर रहेगी।