जमशेदपुर के सलगाझरी रेलवे स्टेशन पर लोकल ट्रेनों का ठहराव बहाल करने की मांग फिर उठी है। संयुक्त ग्राम समन्वय समिति ने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ई-मेल से स्मरण-पत्र भेजा है। समिति का दावा है कि अक्टूबर 2025 से लोकल ट्रेनों का ठहराव बंद है और इसके कारण आसपास के लोगों को रोजाना आवागमन में कठिनाई हो रही है।
समिति के मुख्य संयोजक रामसिंह मुंडा के अनुसार, सलगाझरी और आसपास के क्षेत्र की करीब तीन लाख आबादी इस व्यवस्था से प्रभावित हो रही है। स्टेशन से यात्रा करने वाले दिहाड़ी मजदूरों, सब्जी विक्रेताओं, छोटे कारोबारियों, नौकरीपेशा लोगों और विद्यार्थियों को अब दूसरे परिवहन साधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। समिति का कहना है कि इससे यात्रियों का समय और खर्च दोनों बढ़े हैं।
समिति ने बताया कि यह मांग पहली बार नहीं उठाई गई है। उसके अनुसार, 25 नवंबर 2025 को चक्रधरपुर रेल मंडल के डीआरएम और 28 नवंबर 2025 को प्रधानमंत्री कार्यालय को भी मांग-पत्र भेजा गया था। समिति ने आरोप लगाया है कि इन प्रयासों के बावजूद लोकल ट्रेनों का ठहराव अब तक दोबारा शुरू नहीं किया गया।
स्मरण-पत्र में पांच प्रमुख मांगें रखी गई हैं। इनमें सभी लोकल ट्रेनों का पूर्ववत ठहराव, लंबित अंडरब्रिज का निर्माण, बारीगोड़ा रेलवे फाटक पर ओवरब्रिज, टिकट काउंटर की शुरुआत और प्लेटफॉर्म पर यात्री विश्राम शेड बनाना शामिल है। सलगाझरी से गोविंदपुर तक संपर्क पथ के निर्माण की मांग भी की गई है।
समिति के मुताबिक, सलगाझरी स्टेशन का ऑनलाइन उद्घाटन 26 फरवरी 2024 को प्रधानमंत्री ने किया था। इसी आधार पर संगठन ने स्टेशन की यात्री सुविधाओं और लंबित निर्माण कार्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा करने का अनुरोध किया है। समिति चाहती है कि रेलवे इन कार्यों के लिए स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करे।
रामसिंह मुंडा ने कहा है कि मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल नहीं होने की स्थिति में स्थानीय लोगों और रेल यात्रियों के साथ लोकतांत्रिक आंदोलन किया जाएगा। फिलहाल उपलब्ध विवरण में रेलवे प्रशासन की ओर से समिति के स्मरण-पत्र या ठहराव बहाल करने की मांग पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।