बोकारो इस्पात संयंत्र के प्रशासनिक भवन के पास टू-टैंक गार्डेन में चल रही विस्थापितों की भूख हड़ताल बुधवार को समाप्त हो गई। आंदोलन 12 दिनों से जारी था। बीएसएल प्रबंधन की ओर से मांगों पर सकारात्मक पहल का आश्वासन मिलने के बाद विस्थापित अप्रेंटिस संघ ने हड़ताल खत्म करने का निर्णय लिया।
इससे पहले सेक्टर-5 स्थित बोकारो निवास में उपायुक्त की अध्यक्षता में बीएसएल प्रबंधन और संघ के प्रतिनिधियों की बैठक हुई। वार्ता में परियोजना भूमि एवं पुनर्वास विभाग तथा बीएसएल के अधिकारियों समेत प्रशासन के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक का केंद्र विस्थापित अभ्यर्थियों की नियुक्ति से जुड़ी मांगें रहीं।
संघ ने अप्रेंटिस उत्तीर्ण विस्थापित अभ्यर्थियों को सीधी नियुक्ति देने और चतुर्थवर्गीय पदों में विस्थापितों के लिए आरक्षण की व्यवस्था करने की मांग रखी। अधिकारियों ने बताया कि इन मांगों पर तत्काल निर्णय लेना उनके कार्यक्षेत्र में नहीं है। इसके बावजूद संबंधित स्तरों पर मामला आगे बढ़ाने और समाधान के लिए पहल करने का भरोसा दिया गया।
वार्ता में तय हुआ कि मांगों से संबंधित सहमति पत्र परियोजना भूमि एवं पुनर्वास विभाग के माध्यम से राज्य सरकार को भेजा जाएगा। उपायुक्त के अनुसार यह प्रक्रिया सात दिनों के भीतर पूरी की जानी है। इसके बाद राज्य सरकार दस्तावेज को केंद्र सरकार और सेल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक के पास भेजेगी। प्रशासन ने माना कि मामले का समाधान नीतिगत निर्णय से ही संभव होगा।
बोकारो विधायक श्वेता सिंह ने विस्थापित अप्रेंटिस अभ्यर्थियों को स्थायी नियुक्ति तथा चतुर्थवर्गीय पदों में आरक्षण दिए जाने का समर्थन किया। उन्होंने साथ ही कहा कि विषय पुराना और जटिल होने के कारण इसके समाधान में समय लग सकता है। वार्ता को उन्होंने आगे की प्रक्रिया के लिए रास्ता खुलने के रूप में देखा।
विस्थापित अप्रेंटिस संघ के प्रदीप सोरेन ने बैठक को सकारात्मक बताते हुए कहा कि मिले आश्वासन के आधार पर भूख हड़ताल समाप्त की गई है। संघ ने यह भी स्पष्ट किया कि मांगों की दिशा में प्रगति नहीं होने पर आंदोलन दोबारा शुरू किया जा सकता है। फिलहाल प्रशासन, बीएसएल और राज्य सरकार के स्तर पर प्रस्ताव आगे बढ़ने की प्रतीक्षा रहेगी।