बोकारो स्टील प्लांट में नियोजन की मांग को लेकर विस्थापित अप्रेंटिस संघ और विस्थापित परिवारों का आंदोलन शुक्रवार को सातवें दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारियों ने प्लांट के मुख्य द्वार को छोड़कर अन्य प्रवेश द्वार बंद कर दिए। इसके कारण ड्यूटी पर पहुंचे कई कर्मचारियों को लौटना पड़ा, जबकि कुछ कर्मचारी मुख्य द्वार से अंदर गए।
प्लांट के पास टू-टैंक गार्डन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल चल रही है। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में प्रशिक्षण पूरा कर चुके 1,500 विस्थापित अप्रेंटिस की बहाली शामिल है। वे चतुर्थ वर्ग के पदों पर विस्थापित परिवारों को पहले की तरह नियोजन देने और उनके लिए स्पष्ट रोजगार नीति बनाने की भी मांग कर रहे हैं।
संघ का कहना है कि प्लांट की स्थापना के लिए जमीन देने वाले परिवारों के युवाओं को रोजगार मिलना चाहिए। आंदोलन से जुड़े लोगों के अनुसार, अप्रेंटिसशिप पूरी होने के बाद भी नियुक्ति नहीं मिलने से युवाओं को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। वे ठेका आधारित काम के स्थान पर नियमित बहाली चाहते हैं।
आंदोलनकारियों ने दावा किया कि प्रेम महतो की मौत के बाद हुई त्रिपक्षीय बातचीत में नियोजन के मुद्दे पर सहमति बनी थी, लेकिन 16 महीने बाद भी उस पर अमल नहीं हुआ। यह आंदोलनकारी पक्ष का आरोप है; उपलब्ध विवरण में बीएसएल प्रबंधन या जिला प्रशासन की प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
विस्थापित नौजवान संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष अरुण कुमार महतो ने कहा कि छह दिन की भूख हड़ताल के बाद भी मांगों पर गंभीर पहल नहीं हुई। संघ के सक्रिय नेता सुनील कुमार ने भी आरोप लगाया कि पिछले करीब डेढ़ वर्ष से उन्हें केवल आश्वासन मिले हैं। आंदोलनकारियों ने मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन और तेज करने की चेतावनी दी है।
बोकारो की विधायक श्वेता सिंह सातवें दिन भी धरनास्थल पर मौजूद रहीं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक स्थानीय सांसद ने भी नियोजन की मांग का समर्थन किया है। प्रवेश द्वार बंद किए जाने से प्लांट में कर्मचारियों की आवाजाही प्रभावित हुई है, लेकिन उत्पादन या अन्य कामकाज पर इसके समग्र असर की कोई पुष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।