बोकारो स्टील प्लांट में विस्थापितों और अप्रेंटिस प्रशिक्षण पूरा कर चुके युवाओं का नियोजन आंदोलन रविवार को नौवें दिन भी जारी रहा। प्रशासन ने सुबह हस्तक्षेप कर प्रदर्शनकारियों को मुख्य द्वार से करीब 200 मीटर पीछे हटाया। इसके बाद प्लांट में कर्मचारियों और श्रमिकों की आवाजाही फिर शुरू हो सकी।
आंदोलनकारियों ने शनिवार को प्लांट के सभी 12 गेटों और मुख्य प्रशासनिक भवन की नाकेबंदी कर दी थी। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, इससे करीब चार हजार कर्मचारी और श्रमिक प्लांट के भीतर फंस गए थे तथा उनके लिए भोजन पहुंचाने में भी परेशानी हुई। ब्लास्ट फर्नेस, सिंटर प्लांट और स्टील मेल्टिंग शॉप समेत प्रमुख उत्पादन इकाइयों का परिचालन प्रभावित होने की बात भी सामने आई है।
बीएसएल प्रबंधन ने नाकेबंदी के कारण करीब 30 करोड़ रुपये के नुकसान की आशंका जताई है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहा विस्थापित अप्रेंटिस संघ बीएसएल से प्रशिक्षण पूरा करने वाले करीब 1,500 युवाओं को नौकरी देने की मांग कर रहा है। इस मांग पर प्रबंधन और आंदोलनकारियों के बीच अब तक सहमति नहीं बन सकी है।
मामले के समाधान के लिए शनिवार को बोकारो सर्किट हाउस में जिला प्रशासन, पुलिस, बीएसएल प्रबंधन और राज्य सरकार के प्रतिनिधियों की त्रिपक्षीय बैठक हुई थी। बैठक में विस्थापितों की मांगों पर चर्चा की गई, लेकिन नियोजन के मुद्दे पर कोई सहमति नहीं बनी। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश और विधायक श्वेता सिंह ने धरनास्थल पहुंचकर युवाओं की मांग का समर्थन किया।
चास के अनुमंडल दंडाधिकारी प्रांजल ढांडा के आदेश पर बीएसएल के मुख्य द्वार के 200 मीटर के दायरे में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू की गई है। यह आदेश 18 अक्टूबर की सुबह पांच बजे से अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा। प्रतिबंधित क्षेत्र में पांच या अधिक लोगों के एकत्र होने, जुलूस, सभा और धरना-प्रदर्शन पर रोक रहेगी। हथियारों तथा खुदाई में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों को ले जाने पर भी पाबंदी लगाई गई है।
प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को टू टैंक के पास शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से आंदोलन जारी रखने की अनुमति दी है। संगठनों से किसी भी गेट को जाम नहीं करने और आवागमन सामान्य बनाए रखने में सहयोग की अपील की गई है। फिलहाल प्लांट के गेटों से आवाजाही बहाल हो गई है, लेकिन नियोजन की मांग और आंदोलन दोनों बने हुए हैं।