बोकारो स्टील प्लांट के विस्थापितों की वार्ता विफल, आठवें दिन भी नियोजन आंदोलन जारी

बीएसएल में नियोजन की मांग को लेकर आंदोलनरत विस्थापितों, प्रबंधन और जिला प्रशासन के बीच त्रिपक्षीय वार्ता बेनतीजा रही। वित्त मंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने धरनास्थल पहुंचकर आंदोलन का समर्थन किया।

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बोकारो स्टील प्लांट में नियोजन की मांग को लेकर धरना देते विस्थापित

बोकारो स्टील प्लांट में नियोजन की मांग कर रहे विस्थापितों का आंदोलन आठवें दिन भी जारी रहा। शनिवार को प्रदर्शनकारियों ने प्लांट के सभी प्रवेश द्वार जाम कर दिए। उनकी प्रमुख मांग अप्रेंटिस प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके 1,500 विस्थापितों को रोजगार देने की है।

आंदोलन के बीच झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश धरनास्थल पहुंचे। दोनों नेताओं ने प्रदर्शनकारियों से उनकी मांगों और आंदोलन की स्थिति पर बातचीत की। वित्त मंत्री ने सांकेतिक समर्थन जताते हुए करीब दो घंटे तक आंदोलनकारियों के साथ धरनास्थल पर लेटकर प्रदर्शन में भाग लिया।

इसके बाद बोकारो सर्किट हाउस में विस्थापितों, बीएसएल प्रबंधन और जिला प्रशासन के प्रतिनिधियों के बीच त्रिपक्षीय बैठक हुई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नियोजन की मांग पर प्रबंधन की सहमति नहीं बनने के कारण वार्ता किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी। इसके बाद आंदोलन को जारी रखने की बात कही गई।

वित्त मंत्री ने सवाल उठाया कि यदि 1,500 विस्थापितों को अप्रेंटिस प्रशिक्षण दिया गया था, तो प्रशिक्षण के बाद उनके नियोजन की व्यवस्था क्यों नहीं हुई। उन्होंने रोजगार की जिम्मेदारी तय करने की मांग की और कहा कि प्रशिक्षण किस नीति के तहत कराया गया था, इसे भी स्पष्ट किया जाना चाहिए।

किशोर ने बीएसएल को केंद्र सरकार का उपक्रम बताते हुए आरोप लगाया कि केंद्र झारखंड और यहां के लोगों की समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रहा है। यह उनका राजनीतिक आरोप है; उपलब्ध विवरण में केंद्र सरकार या बीएसएल की ओर से इस टिप्पणी पर कोई अलग प्रतिक्रिया दर्ज नहीं है।

वित्त मंत्री के अनुसार, दुर्गा पूजा के बाद झारखंड सरकार के मंत्री और विधायक भी इस आंदोलन में शामिल होंगे। फिलहाल त्रिपक्षीय बातचीत विफल रहने से नियोजन विवाद का समाधान नहीं निकल पाया है और विस्थापितों ने अपना आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया है।