बोकारो इस्पात संयंत्र के मुख्य द्वार के आसपास कानून-व्यवस्था और औद्योगिक शांति बनाए रखने के लिए प्रशासन ने निषेधाज्ञा लागू कर दी है। चास के अनुमंडल पदाधिकारी प्रांजल ढांडा ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163(1) के तहत मुख्य द्वार से 200 मीटर के दायरे में कई गतिविधियों पर रोक लगाई है। आदेश 18 अक्टूबर की सुबह पांच बजे से अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा।
प्रशासन के अनुसार, विस्थापित अप्रेंटिस संघ और अन्य संगठनों के धरना-प्रदर्शन के दौरान संयंत्र के द्वार बंद किए जा रहे थे। इससे कर्मचारियों, अधिकारियों, संविदा श्रमिकों और आवश्यक सेवाओं से जुड़े लोगों के आवागमन में बाधा पड़ी तथा औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित हुईं। इसी स्थिति को देखते हुए प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया।
निषेधाज्ञा के तहत निर्धारित क्षेत्र में पांच या उससे अधिक लोगों के एक साथ जुटने, भीड़ लगाने या समूह में घूमने की अनुमति नहीं होगी। अस्त्र-शस्त्र के साथ जुलूस, रैली, सभा, धरना या प्रदर्शन भी प्रतिबंधित रहेगा। औद्योगिक कामकाज अथवा सार्वजनिक आवागमन को प्रभावित करने वाली गतिविधियों पर भी रोक लगाई गई है।
आदेश में आग्नेयास्त्रों के अलावा लाठी, डंडा, भाला, गड़ासा, तलवार और तीर-धनुष जैसे हथियार लेकर चलने पर पाबंदी लगाई गई है। कुदाल और गैता जैसे खुदाई के उपकरणों को लेकर क्षेत्र में आने, घूमने या प्रदर्शन करने की भी मनाही है। प्रतिनियुक्त दंडाधिकारियों, पुलिस अधिकारियों और पुलिस बल को इन प्रतिबंधों से अलग रखा गया है।
मौके पर तैनात दंडाधिकारियों और पुलिस अधिकारियों को आदेश का कड़ाई से पालन कराने तथा बीएसएल के मुख्य द्वार से आवागमन सामान्य बनाए रखने का निर्देश दिया गया है। प्रशासन ने संबंधित संगठनों से संयंत्र के किसी भी द्वार को अवरुद्ध नहीं करने और आवश्यक सेवाओं की आवाजाही में सहयोग करने की अपील की है।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि टूटैंक के पास शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से विरोध दर्ज कराने पर उसे आपत्ति नहीं है। उसका कहना है कि लोकतांत्रिक ढंग से मांग रखना नागरिकों का अधिकार है, लेकिन संयंत्र के द्वार जाम होने से सामान्य गतिविधियों और आवश्यक सेवाओं पर असर नहीं पड़ना चाहिए।