लेडी सुपरवाइजर भर्ती में प्रमाणपत्र की तारीख पर हाईकोर्ट का फैसला, छह सप्ताह में नियुक्ति का निर्देश

झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि भर्ती विज्ञापन में स्पष्ट शर्त नहीं होने पर आवेदन की अंतिम तारीख के बाद जारी एनसीएल या ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र के आधार पर अभ्यर्थियों को नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता।

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रांची स्थित झारखंड हाईकोर्ट में लेडी सुपरवाइजर नियुक्ति मामले पर फैसला

रांची में झारखंड हाईकोर्ट ने लेडी सुपरवाइजर नियुक्ति से जुड़े मामले में संबंधित अभ्यर्थियों को राहत दी है। अदालत ने उनके खिलाफ जारी कारण बताओ नोटिस रद्द करते हुए राज्य सरकार और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग को छह सप्ताह के भीतर नियुक्ति संबंधी आवश्यक आदेश जारी करने का निर्देश दिया है।

मामला जेएसएससी के विज्ञापन संख्या 14/2023 के तहत लेडी सुपरवाइजर के 444 पदों पर हुई भर्ती से जुड़ा है। आवेदन की अंतिम तारीख 2 अक्टूबर 2023 थी। परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को 27 मई 2025 को दस्तावेज सत्यापन के लिए चुना गया और आयोग ने 14 अगस्त 2025 को परिणाम जारी किया था।

दस्तावेज सत्यापन के दौरान याचिकाकर्ताओं ने वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के नॉन क्रीमी लेयर तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के प्रमाणपत्र जमा किए थे। प्रमाणपत्र आवेदन की अंतिम तारीख के बाद जारी होने के आधार पर राज्य सरकार ने 25 मई 2026 को कारण बताओ नोटिस दिए, जिससे उनकी नियुक्ति अटक गई थी।

जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने भर्ती विज्ञापन की शर्तों पर विचार करते हुए कहा कि आवेदन की अंतिम तारीख तक निर्धारित शैक्षणिक योग्यता पूरी करना आवश्यक था। पद के लिए समाजशास्त्र, मनोविज्ञान या गृह विज्ञान में मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक की योग्यता मांगी गई थी।

अदालत के अनुसार, विज्ञापन में यह स्पष्ट शर्त नहीं थी कि एनसीएल या ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र भी आवेदन की अंतिम तारीख से पहले जारी होना चाहिए। इसके विपरीत, प्रमाणपत्र दस्तावेज सत्यापन के समय प्रस्तुत करने का प्रावधान था। कोर्ट ने माना कि विभागीय पत्राचार के आधार पर ऐसी अतिरिक्त पाबंदी लागू नहीं की जा सकती, जिसका उल्लेख विज्ञापन या लागू नियमों में न हो।

हाईकोर्ट ने पुराने मामलों को भी मौजूदा विवाद से अलग माना, क्योंकि उनमें प्रमाणपत्र की तारीख को लेकर स्पष्ट शर्तें थीं। अदालत ने सरकार और जेएसएससी को याचिकाकर्ताओं को एनसीएल या ईडब्ल्यूएस अभ्यर्थी मानते हुए संबंधित आरक्षित रिक्तियों पर नियुक्त करने का निर्देश दिया।