भवनाथपुर में चार दशक बाद भी यात्री ट्रेन का इंतजार, ग्रामीणों ने तेज की मांग

मेराल से भवनाथपुर तक मौजूद रेलखंड पर यात्री सेवा शुरू करने की मांग फिर उठी है। ग्रामीणों ने रेल मंत्री को मांगपत्र भेजकर सकारात्मक पहल नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है।

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भवनाथपुर क्षेत्र में यात्री रेल सेवा की मांग से जुड़ा मौजूदा रेलखंड

गढ़वा जिले के भवनाथपुर और आसपास के इलाकों को यात्री रेल सेवा से जोड़ने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। स्थानीय ग्रामीणों ने रेल मंत्री के नाम मांगपत्र भेजकर मेराल-भवनाथपुर रेलखंड पर यात्री ट्रेन चलाने की पहल करने का आग्रह किया है। ग्रामीणों ने 15 दिनों में सकारात्मक पहल नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी भी दी है।

भवनाथपुर को रेल यातायात से जोड़ने की मांग वर्ष 1985 से उठती रही है। वर्ष 2007 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने सार्वजनिक मंच से यहां यात्री ट्रेन चलाने की घोषणा की थी। इसके बाद वर्ष 2009 में मेराल से टाउनशिप होते हुए उत्तर प्रदेश के सलाईबनवा स्टेशन तक रेल लाइन के विस्तार का सर्वे कराया गया, लेकिन परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी।

मेराल से भवनाथपुर तक करीब 34 किलोमीटर लंबी रेल लाइन पहले से मौजूद है। इसे भवनाथपुर की खदानों से लाइम स्टोन और डोलोमाइट की माल ढुलाई के लिए बनाया गया था। यहां से खनिज बोकारो, भिलाई और राउरकेला जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में भेजे जाते थे। वर्ष 1990 में क्रशिंग प्लांट और वर्ष 2020 में डोलोमाइट खदान बंद होने के बाद मालगाड़ियों का परिचालन भी थम गया।

यात्री ट्रेन की मांग को लेकर वर्ष 2022 में ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मेराल रेलवे स्टेशन पर धनबाद रेल मंडल के डीआरएम के नाम ज्ञापन सौंपा था। सितंबर 2026 में भवनाथपुर और खरौंधी क्षेत्र में हुई बैठकों के बाद मांग को संगठित रूप देने के लिए संघर्ष समिति बनाने की पहल हुई। 21 सितंबर को मझिआंव प्रखंड के दवनकरा में रेलवे लाइन के किनारे ग्रामीणों ने बैठक की।

अब स्थानीय संगठनों और ग्रामीणों की मांग केवल भवनाथपुर तक सीमित नहीं है। वे मेराल से भवनाथपुर, खरौंधी, कोन और सलाईबनवा होते हुए चोपन तक रेल संपर्क विकसित करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे भवनाथपुर, मेराल, खरौंधी, केतार, मझिआंव, बरडीहा और विशुनपुरा समेत आसपास के क्षेत्रों को आवागमन का वैकल्पिक साधन मिल सकता है।

लंबे समय से नियमित परिचालन नहीं होने के कारण मौजूदा रेलखंड की तकनीकी स्थिति और सुरक्षा का आकलन भी जरूरी होगा। ट्रैक से जुड़ी सामग्री की चोरी की शिकायतें सामने आने का उल्लेख किया गया है। ग्रामीणों की मांग है कि रेलवे पहले मेराल-भवनाथपुर रेलखंड की तकनीकी जांच और आवश्यक मरम्मत कराए, फिर यात्री सेवा शुरू करने तथा चोपन तक विस्तार की दिशा में कदम बढ़ाए।