झारखंड हाईकोर्ट ने जब्त पिकअप छोड़ने का आदेश दिया, बिहार के शराब कानून पर निचली अदालत का फैसला रद्द

झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम, 2016 झारखंड में लागू नहीं होता। अदालत ने इसी कानून के आधार पर वाहन नहीं छोड़ने के आदेश को कानूनी त्रुटि मानते हुए निरस्त कर दिया।

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रांची स्थित झारखंड हाईकोर्ट का भवन और न्यायालय परिसर

रांची स्थित झारखंड हाईकोर्ट ने शराब की कथित अवैध ढुलाई से जुड़े एक मामले में जब्त पिकअप वाहन को छोड़ने का आदेश दिया है। जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम, 2016 का विस्तार झारखंड तक नहीं है। अदालत ने इस कानून के प्रावधानों पर आधारित बोकारो सत्र अदालत के आदेश को गंभीर कानूनी त्रुटि माना।

हाईकोर्ट रितेश प्रधान बनाम झारखंड राज्य मामले में वाहन मालिक की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। पिकअप को बोकारो जिले के पिंड्राजोरा थाना कांड संख्या 18/2026 में जब्त किया गया था। आरोप था कि वाहन से 750 मिलीलीटर वाली बोतलों के 145 कार्टन शराब ले जाए जा रहे थे।

वाहन मालिक ने पिकअप मुक्त कराने के लिए पहले बोकारो की न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत में आवेदन दिया था। मजिस्ट्रेट ने यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया कि जब्ती की कार्रवाई शुरू करने के लिए उपायुक्त को अनुरोध भेजा जा चुका है। इसके बाद मालिक ने बोकारो के सत्र न्यायाधीश के समक्ष आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दायर की, लेकिन वहां भी राहत नहीं मिली।

सत्र अदालत ने बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम, 2016 के प्रावधानों के आधार पर माना था कि कथित अवैध शराब के परिवहन में इस्तेमाल वाहन जब्ती योग्य है। आदेश में यह भी कहा गया था कि ऐसी संपत्ति से जुड़े मामले में आपराधिक अदालत को अधिकार नहीं है। इसी फैसले को वाहन मालिक ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि वाहन की जब्ती की प्रक्रिया वास्तव में शुरू नहीं हुई है। यह दलील भी दी गई कि लंबे समय तक खड़ा रहने से पिकअप खराब हो सकता है। याचिकाकर्ता के अनुसार, वाहन कर्ज लेकर व्यावसायिक उपयोग के लिए खरीदा गया था और लगातार जब्त रहने से उसे आर्थिक नुकसान हो रहा था।

हाईकोर्ट ने कहा कि संबंधित बिहार कानून अपनी धारा 1(2) के अनुसार पूरे बिहार में लागू है, लेकिन झारखंड में इसका विस्तार नहीं किया गया है। अदालत ने बिहार और झारखंड के अलग राज्य बनने का उल्लेख करते हुए सत्र अदालत का आदेश निरस्त कर दिया तथा जब्त वाहन को मुक्त करने का निर्देश दिया।