मनरेगा में 603.91 करोड़ रुपये की देनदारी लंबित, गिरिडीह में सर्वाधिक बकाया: कैग

कैग की जांच में झारखंड में मनरेगा मजदूरी और सामग्री मद के भुगतान में देरी सामने आई। छह चयनित जिलों में गिरिडीह की लंबित देनदारी सबसे अधिक दर्ज की गई।

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झारखंड में मनरेगा की लंबित देनदारी पर कैग रिपोर्ट से संबंधित सांकेतिक दृश्य

झारखंड में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के क्रियान्वयन और भुगतान व्यवस्था पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट ने सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच योजना की कुल 603.91 करोड़ रुपये की देनदारी लंबित थी। इसमें अकुशल मजदूरों की 321.84 करोड़ रुपये की मजदूरी और सामग्री मद के 262.28 करोड़ रुपये शामिल थे। मार्च 2025 तक इन देनदारियों का पूर्ण भुगतान नहीं हुआ था।

कैग ने छह चयनित जिलों के अभिलेखों की जांच की। इन जिलों में मार्च 2025 तक मजदूरी, सामग्री और कर से जुड़ी कुल 218.58 करोड़ रुपये की देनदारी मिली। गिरिडीह में सर्वाधिक 80.36 करोड़ रुपये बकाया थे। इसके बाद गढ़वा में 56.13 करोड़, गोड्डा में 30.61 करोड़, पाकुड़ में 19.28 करोड़, गुमला में 18.73 करोड़ और पूर्वी सिंहभूम में 13.47 करोड़ रुपये लंबित पाए गए।

गिरिडीह की कुल देनदारी में अकुशल मजदूरी के 28.94 करोड़ और सामग्री मद के 48 करोड़ रुपये शामिल थे। गढ़वा में मजदूरी के 31.21 करोड़ तथा सामग्री के 23.81 करोड़ रुपये बकाया मिले। राज्य के वर्षवार आंकड़ों में सबसे अधिक 349.96 करोड़ रुपये की लंबित देनदारी 2021-22 में दर्ज की गई थी।

भुगतान की समयसीमा की जांच में भी कमियां सामने आईं। छह जिलों के 480 कार्यों में से 423 के मस्टर रोल की पड़ताल के दौरान मजदूरी देने में एक दिन से लेकर 180 दिन से अधिक की देरी मिली। निर्धारित अवधि के बाद विलंब होने पर मुआवजे का प्रावधान था, लेकिन जांचे गए मामलों में किसी मजदूर को यह राशि नहीं मिली। 4,300 मस्टर रोल में 7.38 लाख रुपये का विलंब मुआवजा देय पाया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, 5,308 परिवारों को मांग के 15 दिनों के भीतर काम नहीं मिला। उनके लिए 5.05 लाख रुपये बेरोजगारी भत्ता देय था, जबकि 1.89 लाख रुपये ही चुकाए गए। अप्रैल 2025 तक 3.16 लाख रुपये बाकी थे। वर्ष 2019 से 2024 के बीच अकुशल मजदूरी से जुड़े 42,45,281 लेन-देन भी अस्वीकृत हुए, जिनकी कुल राशि 231.09 करोड़ रुपये थी।

योजना के कार्यों की प्रगति में भी बड़ा अंतर दर्ज किया गया। वर्ष 2019-24 के दौरान 1,02,68,484 कार्य प्रस्तावित किए गए, लेकिन मार्च 2024 तक 27,96,044 कार्य ही पूरे हुए। कैग ने समय पर मजदूरी और बेरोजगारी भत्ते का भुगतान, नियमित सामाजिक अंकेक्षण, बेहतर अभिलेख प्रबंधन, पारदर्शिता तथा शिकायतों के शीघ्र निपटारे की व्यवस्था मजबूत करने की सिफारिश की है।