मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मधु कोड़ा को राहत नहीं, झारखंड हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की

झारखंड हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा की आरोपों में बदलाव से जुड़ी याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि आरोप बदलने या नया आरोप जोड़ने का अधिकार संबंधित अदालत के पास है।

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झारखंड हाईकोर्ट में मधु कोड़ा से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले पर सुनवाई

रांची में झारखंड हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपों में बदलाव की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने स्पष्ट किया कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 216 के तहत आरोप बदलने या नया आरोप जोड़ने का अधिकार संबंधित अदालत के पास है। आरोपी अथवा अभियोजन पक्ष इसे अपने अधिकार के रूप में नहीं मांग सकता।

अदालत के अनुसार, फैसला सुनाए जाने से पहले किसी भी समय आरोप में बदलाव किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए रिकॉर्ड पर प्रासंगिक सामग्री उपलब्ध होना आवश्यक है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि धारा 482 के तहत अंतर्निहित शक्ति का इस्तेमाल अत्यंत सावधानी से किया जाता है और इसे अपील या पुनरीक्षण के विकल्प के तौर पर नहीं अपनाया जा सकता।

सुनवाई के दौरान मधु कोड़ा की ओर से अधिवक्ता नवीन कुमार सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के विजय मदनलाल चौधरी मामले के फैसले का उल्लेख किया। उन्होंने दलील दी कि ईडी की विशेष अदालत एजेंसी के आवेदनों पर आरोपों में कई बार बदलाव कर चुकी है, जबकि कोड़ा के आवेदन पर निर्णय नहीं लिया गया। उनकी ओर से सीआरपीसी की धारा 226 के अनुपालन पर भी सवाल उठाया गया।

याचिका में ईडी के मामले में दर्ज रकम और मूल अपराध से संबंधित जांच में सामने आई रकम के अंतर को आधार बनाया गया था। कोड़ा की ओर से कहा गया कि ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग प्रकरण में करीब 3,600 करोड़ रुपये का उल्लेख किया है। आरोप में उनके विरुद्ध 1,340 करोड़ रुपये और 12.14 लाख डॉलर को अपराध से प्राप्त राशि के रूप में दिखाया गया है।

मामले की शुरुआत 2009 में निगरानी थाने में दर्ज केस से हुई थी। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, निगरानी ने जनवरी 2010 में करीब 1.40 करोड़ रुपये से जुड़े मामले में आरोपपत्र दाखिल किया। बाद में हाईकोर्ट के आदेश पर जांच सीबीआई को मिली। सीबीआई की पहली चार्जशीट में करीब 13 करोड़ रुपये तथा मई 2013 की अंतिम चार्जशीट में 8.42 करोड़ रुपये की आय से अधिक संपत्ति का उल्लेख किया गया था।

ईडी के मामले में सितंबर 2012 में आरोप तय करते समय अपराध से प्राप्त राशि 3,549.72 करोड़ रुपये और 24,29,990 डॉलर बताई गई थी। बाद के वर्षों में आरोपों और राशि में बदलाव किए गए तथा कुछ नई कंपनियों को आरोपी बनाया गया। हाईकोर्ट के ताजा निर्णय के बाद आरोपों में किसी परिवर्तन पर विचार करने का अधिकार ट्रायल कोर्ट के पास ही रहेगा।