मरकच्चो की 4.20 एकड़ जमीन पर पीसीसी सड़क निर्माण रोकने का हाईकोर्ट का आदेश

झारखंड हाईकोर्ट ने मालिकाना हक से जुड़े विवाद के बीच मरकच्चो की संबंधित जमीन पर यथास्थिति बनाए रखने और अगली सुनवाई तक पीसीसी सड़क नहीं बनाने का निर्देश दिया है।

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मरकच्चो की 4.20 एकड़ जमीन पर पीसीसी सड़क निर्माण रोकने संबंधी खबर

झारखंड हाईकोर्ट ने कोडरमा जिले के मरकच्चो में 4.20 एकड़ जमीन के मालिकाना हक से जुड़े मामले में अंतरिम आदेश दिया है। अदालत ने संबंधित जमीन पर मौजूदा स्थिति बनाए रखने तथा अगली सुनवाई तक किसी भी प्रकार की पीसीसी सड़क का निर्माण नहीं करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।

जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने याचिकाकर्ताओं की अंतरिम अर्जी स्वीकार करते हुए यह निर्देश दिया। विवाद मौजा मरकच्चो के थाना संख्या 141, खाता संख्या 1818 और प्लॉट संख्या 620 की जमीन से संबंधित है। दामोदर प्रसाद कुशवाहा एवं अन्य ने इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका संख्या 5299/2025 दाखिल की है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में कहा गया कि जमीन के स्वामित्व को लेकर पहले टाइटल सूट संख्या 1/1980 दायर हुआ था। उनका दावा है कि उस मुकदमे में जमीन का अधिकार उनके पूर्वज के पक्ष में घोषित किया गया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि राजस्व अभिलेख के रजिस्टर-दो में उनके नाम दर्ज हैं, जबकि जमीन को गलत तरीके से गैरमजरुआ श्रेणी में दिखाया गया है।

अदालत के समक्ष याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारी मुआवजा दिए बिना जिला योजना के तहत इस जमीन पर पीसीसी सड़क बनाने की तैयारी कर रहे हैं। उनकी दलील है कि यदि सरकार या कोई विभाग सड़क के लिए जमीन का उपयोग करना चाहता है तो पहले निर्धारित कानून के अनुसार भू-अर्जन की प्रक्रिया पूरी की जाए और मुआवजा दिया जाए।

याचिकाकर्ताओं ने अपनी दलील को संविधान के अनुच्छेद 300ए में निहित संपत्ति के अधिकार से भी जोड़ा। उन्होंने दावा किया कि जमीन पर सरकार का अधिकार बताने वाला पक्ष पूर्व की टाइटल अपील में खारिज हो चुका है। अदालत में उनकी ओर से अधिवक्ता रवि कुमार और राजीव कुमार पांडेय ने पक्ष रखा।

हाईकोर्ट का मौजूदा निर्देश अंतरिम प्रकृति का है और जमीन के स्वामित्व विवाद पर अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है। फिलहाल आदेश का प्रभाव यह होगा कि अगली सुनवाई तक विवादित भूखंड की स्थिति बदली नहीं जा सकेगी और वहां पीसीसी सड़क निर्माण स्थगित रहेगा। आगे की सुनवाई में पक्षों की दलीलों के आधार पर अदालत मामले पर विचार करेगी।