मसानजोर डैम के पास एकीकृत मत्स्य केंद्र की तैयारी, उत्पादन से बाजार तक बनेगा ढांचा

दुमका के मसानजोर डैम को आधुनिक मत्स्य उत्पादन और व्यापार केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। प्रस्तावित ढांचे में हैचरी, फीड मिल, प्रसंस्करण इकाई, आइस प्लांट और बाजार शामिल होंगे।

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दुमका के मसानजोर डैम क्षेत्र में प्रस्तावित एकीकृत मत्स्य परियोजना

दुमका के मसानजोर डैम क्षेत्र को मत्स्य उत्पादन के साथ कारोबार के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है। प्रस्तावित एकीकृत मत्स्य पालन परियोजना में बीज तैयार करने से लेकर मछलियों के प्रसंस्करण, सुरक्षित भंडारण और बिक्री तक की सुविधाएं एक स्थान पर उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है।

करीब 110 करोड़ रुपये की पूरी परियोजना में राज्य के आठ प्रमुख, 11 मध्यम और 23 छोटे डैम शामिल किए गए हैं। संताल परगना प्रमंडल से मसानजोर इसका हिस्सा है। अन्य प्रमुख जलाशयों में मैथन, गेतलसूद, तिलैया, तेनुघाट, चांडिल और कोनार का उल्लेख किया गया है। प्रस्तावित खर्च में केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी 60:40 रखने की बात है।

मसानजोर के पास आधारभूत सुविधाएं विकसित करने के लिए लगभग चार हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता बताई गई है। यहां एक हेक्टेयर में सीड रियरिंग यूनिट और आधा हेक्टेयर में आधुनिक हैचरी बनाने का प्रस्ताव है। इसके अतिरिक्त लैंडिंग सेंटर, फीड मिल, प्रसंस्करण इकाई, आइस प्लांट तथा थोक और खुदरा मछली बाजार तैयार किए जाने हैं।

डैम में पिछले दस से बारह वर्षों के दौरान फ्लोटिंग केज कल्चर से मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा मिला है। उत्पादन बढ़ने के बाद स्थानीय मछुआरों के सामने विपणन, पैकेजिंग और भंडारण से जुड़ी चुनौतियां भी आई हैं। प्रस्तावित लैंडिंग सेंटर और बाजार बनने पर मछलियों की स्थानीय स्तर पर नीलामी तथा बिक्री की सुविधा मिलने की उम्मीद है।

पश्चिम बंगाल की सीमा के पास स्थित होने के कारण मसानजोर से मछलियां बंगाल, बिहार और पूर्वोत्तर के थोक बाजारों तक भेजने की संभावना जताई गई है। आइस प्लांट और प्रसंस्करण सुविधा तैयार होने पर परिवहन के दौरान मछलियों के खराब होने का जोखिम घट सकता है। हैचरी और फीड मिल से स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ने की भी अपेक्षा है।

परियोजना में मछलियों के अवशेषों से जैविक खाद और पूरक आहार बनाने के लिए अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। इसके साथ 10 अमृत सरोवरों के विकास पर तीन करोड़ रुपये खर्च करने का प्रावधान है। विभाग जल संसाधन विभाग के साथ मिलकर डैम का प्रभावी क्षेत्रफल और मत्स्य संचयन क्षमता तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है।