दुमका जिले के रानीश्वर प्रखंड में स्थित मसानजोर डैम का पनबिजली केंद्र अभी अपनी कुल क्षमता के मुकाबले आधा उत्पादन कर रहा है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, केंद्र की एक यूनिट से दो मेगावाट बिजली बन रही है और इसकी पूरी आपूर्ति पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिला मुख्यालय सिउड़ी को की जा रही है।
केंद्र में दो उत्पादन इकाइयां स्थापित हैं। दोनों के चालू रहने पर कुल चार मेगावाट बिजली पैदा करने की व्यवस्था है, लेकिन एक यूनिट लंबे समय से खराब पड़ी है। इस कारण फिलहाल केवल एक इकाई से उत्पादन हो रहा है और स्थापित क्षमता का आधा हिस्सा ही उपयोग में आ पा रहा है।
मसानजोर डैम झारखंड की सीमा में मयूराक्षी नदी पर बना है। इसका निर्माण तत्कालीन बिहार में पहली पंचवर्षीय योजना के दौरान कनाडा सरकार के सहयोग से कराया गया था। वर्ष 1955-56 में निर्माण पूरा होने के बाद डैम के पानी का इस्तेमाल सिंचाई के साथ पनबिजली बनाने के लिए भी शुरू हुआ था।
पनबिजली केंद्र के शुरुआती वर्षों में यहां तैयार बिजली सिउड़ी के अलावा दुमका और रानीश्वर क्षेत्र को भी दी जाती थी। इससे डैम के आसपास और दुमका के स्थानीय इलाकों को भी उत्पादन का सीधा लाभ मिलता था। उपलब्ध जानकारी में कहा गया है कि वर्ष 1995 के बाद झारखंड क्षेत्र में इस केंद्र से बिजली की आपूर्ति बंद हो गई।
वर्तमान व्यवस्था में मसानजोर में उत्पादन जारी रहने के बावजूद रानीश्वर और दुमका को यहां की बिजली नहीं मिल रही है। चालू यूनिट से बनने वाली दो मेगावाट बिजली सिउड़ी भेजी जा रही है। वहीं दूसरी इकाई बंद होने से केंद्र अपनी पूरी उत्पादन क्षमता तक नहीं पहुंच पा रहा है।
यह स्थिति स्थानीय स्तर पर बिजली के वितरण और पनबिजली केंद्र की बंद इकाई से जुड़ा महत्वपूर्ण सवाल सामने लाती है। हालांकि उपलब्ध विवरण में खराब यूनिट की मरम्मत, उसे दोबारा चालू करने की समयसीमा या झारखंड के क्षेत्रों को फिर से आपूर्ति शुरू करने संबंधी किसी आधिकारिक निर्णय की जानकारी नहीं दी गई है।