रामगढ़ के पतरातू पावर प्लांट में कोयले का भंडार गंभीर स्तर पर पहुंचने के बाद आपूर्ति बढ़ाने की तैयारी की गई है। बीसीसीएल से संयंत्र को कम से कम एक अतिरिक्त रैक कोयला उपलब्ध कराने को कहा गया है, ताकि ईंधन की कमी का असर बिजली उत्पादन पर न पड़े।
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार, देश के 57 ताप बिजली संयंत्रों में कोयले का स्टॉक निर्धारित मानक से काफी नीचे है। इन संयंत्रों की कुल उत्पादन क्षमता करीब 223.87 गीगावाट है। उनके पास लगभग 27.14 मिलियन टन कोयला उपलब्ध है, जो तय मानक भंडार का करीब 47 प्रतिशत बताया गया है।
झारखंड के दो बिजली संयंत्रों को गंभीर कोयला स्टॉक वाली श्रेणी में रखा गया है। इनमें पतरातू पावर प्लांट शामिल है। नॉर्थ कर्णपुरा पावर प्लांट में भी पर्याप्त भंडार बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है। कम स्टॉक वाले संयंत्रों तक जरूरत के अनुसार कोयला पहुंचाने के लिए संबंधित कंपनियों को आपूर्ति बढ़ाने के निर्देश दिए जा रहे हैं।
बीसीसीएल के बिक्री विभाग के एक अधिकारी ने रविवार को पतरातू के लिए अतिरिक्त रैक उपलब्ध कराने की बात की पुष्टि की। कंपनी के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक मनोज कुमार अग्रवाल भी बिजली संयंत्रों तक अधिक कोयला पहुंचाने की स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।
राज्यवार स्थिति में उत्तर प्रदेश के 11 संयंत्र गंभीर स्टॉक की श्रेणी में हैं। राजस्थान के आठ और मध्य प्रदेश के छह संयंत्र इस सूची में हैं। महाराष्ट्र और तमिलनाडु के पांच-पांच तथा छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश के चार-चार बिजली संयंत्रों में भी निर्धारित मानक से कम कोयला होने की जानकारी दी गई है।
कोयला भंडार और आपूर्ति की स्थिति पर केंद्रीय स्तर से भी निगरानी रखी जा रही है। एजेंसियों और कोयला कंपनियों को जरूरत के अनुसार आपूर्ति बढ़ाने तथा संयंत्रों में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने पर जोर देने को कहा गया है। पतरातू के लिए अतिरिक्त रैक की व्यवस्था इसी प्रयास का हिस्सा है।