लातेहार जिले के महुआडांड़ में पैदा होने वाला पारंपरिक सुगंधित जीराफूल चावल अब स्थानीय दायरे से निकलकर प्रीमियम बाजार तक पहुंच रहा है। नेतरहाट फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड को इसकी खरीद के लिए 25 मीट्रिक टन का पहला बड़ा व्यावसायिक ऑर्डर मिला है। खरीद आदेश का कुल मूल्य 26.25 लाख रुपये बताया गया है।
इस ऑर्डर के तहत जीराफूल चावल को एक और दो किलोग्राम के पैकेट में उपलब्ध कराया जाना है। दोनों आकारों को मिलाकर कुल 16,250 पैकेट तैयार किए जाएंगे। ऑर्डर की आपूर्ति के क्रम में 31 अगस्त को करीब 6.70 मीट्रिक टन चावल की पहली खेप लातेहार से गुरुग्राम स्थित खरीदार के वेयरहाउस के लिए भेजी गई थी।
जीराफूल चावल अपनी विशिष्ट सुगंध, महीन दाने, मुलायम बनावट और स्वाद के लिए जाना जाता है। महुआडांड़ क्षेत्र में इसकी खेती लंबे समय से की जाती रही है। अब बेहतर प्रसंस्करण, पैकेजिंग और बाजार संपर्क के माध्यम से इस पारंपरिक उपज को मूल्यवर्धित कृषि उत्पाद के रूप में दूसरे राज्यों के ग्राहकों तक पहुंचाने की पहल की जा रही है।
महुआडांड़ में जिला प्रशासन की ओर से स्थापित राइस कम पीनट प्रोसेसिंग यूनिट का संचालन नेतरहाट फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी कर रही है। इस किसान उत्पादक संगठन से करीब 1,500 किसान जुड़े हैं। इकाई के कारण स्थानीय स्तर पर ही चावल के प्रसंस्करण और पैकेजिंग की सुविधा उपलब्ध हो रही है।
झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी के सहयोग से एफपीओ को उत्पाद तैयार करने, उसकी पैकेजिंग करने और बाजार से जोड़ने में मदद मिली है। सोसाइटी के सेतु सेल की पहल के जरिए किसानों, उत्पादक संगठन और खरीदारों के बीच संपर्क मजबूत करने का काम किया गया है।
पहला बड़ा खरीद आदेश महुआडांड़ की पारंपरिक धान उपज के बाजार विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव है। इससे जीराफूल चावल को व्यवस्थित पैकेजिंग के साथ व्यापक बाजार में पेश करने का अवसर मिला है। साथ ही स्थानीय प्रसंस्करण इकाई और उससे जुड़े किसानों के उत्पाद को दूसरे राज्य के उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की प्रक्रिया आगे बढ़ी है।