रांची में मिट्टी और मोरम के वैध चालान से जुड़ी प्रक्रियागत अड़चन के कारण झारखंड की करीब 2000 करोड़ रुपये की ग्रामीण सड़क योजनाओं का काम प्रभावित हुआ है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, निर्माण एजेंसियों के भुगतान रुकने के बाद कई ठेकेदारों ने कार्यस्थलों से मशीनें और मजदूर हटा लिए हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों को पक्की सड़कों से जोड़ने वाली चालू परियोजनाओं की गति थम गई है।
इन सड़क योजनाओं पर जुलाई से लगातार तीन महीने तक मानसूनी बारिश का असर पड़ा था। बारिश समाप्त होने के बाद निर्माण दोबारा तेज होने की उम्मीद थी, लेकिन मिट्टी-मोरम के चालान की समस्या नई बाधा बन गई। सड़क निर्माण में इन सामग्रियों का इस्तेमाल होता है और अब इनके वैध चालान का सत्यापन भुगतान के लिए जरूरी बताया गया है।
खान विभाग के नियमों के तहत चालान जमा होने और उसकी जांच के बाद ही ठेकेदारों के बिलों का भुगतान किया जा सकता है। दूसरी ओर, ठेकेदारों और संबंधित एजेंसियों का कहना है कि मौजूदा खनन पोर्टल या व्यवस्था में मिट्टी और मोरम का चालान तैयार करने की स्पष्ट सुविधा उपलब्ध नहीं है। जरूरी दस्तावेज नहीं मिलने के कारण उनके बिल लंबित हैं।
सड़क निर्माण से जुड़े विभागों के अभियंता भी नियमों की इस उलझन के बीच बकाया भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। भुगतान अटकने से ठेकेदारों ने आगे काम करने में असमर्थता जताई है। प्रशासनिक समाधान होने तक प्रभावित योजनाओं को फिर से गति देना मुश्किल माना जा रहा है।
समस्या दूर करने के लिए राज्य सरकार ने चालान जारी करने की वर्तमान प्रक्रिया और संबंधित नियमों में बदलाव की तैयारी शुरू की है। प्रस्ताव को आगामी कैबिनेट बैठक में मंजूरी के लिए रखे जाने की बात सामने आई है। हालांकि, प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय कैबिनेट की स्वीकृति के बाद ही होगा।
प्रस्तावित व्यवस्था में पहले अपनाई गई प्रक्रिया बहाल करने की तैयारी है। इसके तहत निर्माण में मिट्टी या मोरम का उपयोग होने पर संबंधित विभाग ठेकेदार के बिल से उसकी दोगुनी राशि काटकर खान विभाग के खाते में जमा कर सकेगा। मंजूरी मिलने पर कागजी अड़चन कम होने, लंबित भुगतान आगे बढ़ने और रुकी ग्रामीण सड़क परियोजनाओं का काम दोबारा शुरू होने की उम्मीद है।