हजारीबाग के हुरहुरू में खासमहल जमीन से जुड़ी प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता योगेंद्र साव की टिप्पणी ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश कांग्रेस की अनुशासन समिति ने मामले को गंभीरता से लेते हुए साव को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
नोटिस में योगेंद्र साव को तीन दिनों के भीतर लिखित जवाब देने को कहा गया है। उन्हें समिति के समक्ष स्वयं उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का निर्देश भी दिया गया है। समिति ने पूछा है कि पार्टी के संविधान और अनुशासन के तहत उनके विरुद्ध कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए। अब आगे का निर्णय उनके स्पष्टीकरण के आधार पर होने की संभावना है।
विवाद हुरहुरू में 50 डिसमिल खासमहल जमीन पर प्रशासन की कार्रवाई के समय सामने आया। रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान साव का अधिकारियों से विवाद हुआ था। बाद में उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्य सरकार को लेकर मीडिया के सामने तीखी टिप्पणी की। इसी बयान के बाद कांग्रेस के भीतर अनुशासन का प्रश्न उठाया गया।
यह पहली बार नहीं है जब योगेंद्र साव को सार्वजनिक बयानबाजी के कारण पार्टी की कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। मार्च 2026 में मुख्यमंत्री और गठबंधन सरकार पर टिप्पणियों के बाद कांग्रेस ने उन्हें तीन वर्षों के लिए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित किया था। जून 2026 में पार्टी नेतृत्व ने वह निष्कासन रद्द कर दिया और उन्हें दोबारा संगठन में शामिल कर लिया था।
साव के ताजा बयान पर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भी आपत्ति जताई है। पार्टी नेताओं ने कांग्रेस से कार्रवाई की मांग करते हुए राज्य में दोनों दलों की गठबंधन सरकार का उल्लेख किया है। झामुमो के केंद्रीय उपाध्यक्ष और राज्यसभा सांसद बैद्यनाथ राम ने भी बयान की निंदा की तथा कांग्रेस नेतृत्व से इस प्रकरण पर कदम उठाने को कहा है।
फिलहाल कांग्रेस ने कोई अंतिम अनुशासनात्मक फैसला घोषित नहीं किया है। मामला साव के लिखित उत्तर और समिति के सामने दिए जाने वाले स्पष्टीकरण पर टिका है। इस घटनाक्रम का केंद्र हजारीबाग की प्रशासनिक कार्रवाई है, लेकिन इसके राजनीतिक प्रभाव को सत्तारूढ़ गठबंधन के आपसी संबंधों से जोड़कर देखा जा रहा है।