गढ़वा जिले के रंका प्रखंड में मानपुर आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-2 का संचालन भवन पर कब्जे के विवाद के कारण प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि भवन में भू-दाता अपने परिवार के साथ रह रहे हैं और पिछले एक महीने से बच्चे केंद्र नहीं पहुंच रहे हैं। उन्होंने केंद्र में बर्तन तथा दूसरी जरूरी सामग्री की कमी की शिकायत भी की है।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, यह स्थिति करीब दस वर्षों से बनी हुई है। उनका आरोप है कि बच्चों को नियमित पोषाहार नहीं मिल रहा और कभी-कभी केवल खिचड़ी दी जाती है। भवन का उपयोग आंगनबाड़ी गतिविधियों के लिए नहीं हो पाने से बच्चों की नियमित उपस्थिति और केंद्र की सेवाओं पर असर पड़ने की बात सामने आई है।
केंद्र की सेविका मीना देवी ने बताया कि वह इस समय बीएलओ के साथ विशेष गहन पुनरीक्षण के काम में भी लगी हैं। उनके मुताबिक, भवन पर कब्जे की जानकारी विभाग को लिखित रूप में दी जा चुकी है। उन्होंने खाद्य सामग्री की बढ़ी कीमतों के कारण बच्चों के भोजन की व्यवस्था प्रभावित होने की बात भी कही है।
वहीं, भू-दाता इलाहीबक्स अंसारी का कहना है कि भवन निर्माण के समय उन्हें जमीन का मुआवजा देने की बात कही गई थी। उनका दावा है कि मुआवजा नहीं मिलने के कारण वह भवन में रह रहे हैं। इस दावे की स्वतंत्र या विभागीय पुष्टि उपलब्ध विवरण में नहीं दी गई है।
बाल विकास परियोजना पदाधिकारी बिंदु कुमारी के अनुसार, मामला सामने आने के बाद भवन खाली करने के लिए नोटिस जारी किया गया था, लेकिन अब तक कब्जा नहीं हटाया गया है। उन्होंने कहा कि अगला कदम थाना में प्राथमिकी दर्ज कराने की कार्रवाई होगा। ग्रामीणों और एक स्थानीय आरटीआई कार्यकर्ता ने भी संबंधित अधिकारियों से सरकारी भवन को खाली कराकर बच्चों के लिए केंद्र का नियमित संचालन सुनिश्चित करने की मांग की है।