रांची एयरपोर्ट पर 107.98 करोड़ की टैक्सीवे परियोजना का काम शुरू, 365 दिन में पूरा करने का लक्ष्य

एएआई ने पैरेलल टैक्सी ट्रैक और रैपिड एग्जिट टैक्सीवे के लिए नई एजेंसी चुनी है। परियोजना से रनवे के बेहतर उपयोग और एयरपोर्ट की परिचालन क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।

2 मिनट पढ़ें 2 बार पढ़ी गई
रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर विमान और रनवे का दृश्य

रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर लंबे समय से लंबित पैरेलल टैक्सी ट्रैक और रैपिड एग्जिट टैक्सीवे परियोजना फिर आगे बढ़ी है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने 107.98 करोड़ रुपये के नए टेंडर के बाद एजेंसी का चयन किया है। चयनित एजेंसी ने काम शुरू कर दिया है और इसे पूरा करने के लिए 365 दिनों की अवधि तय की गई है।

यह परियोजना पहली बार वर्ष 2022 में एएआई के पूंजीगत बजट में शामिल की गई थी। निर्माण शुरू करने की निर्धारित तारीख 5 जनवरी 2024 थी और मूल योजना के अनुसार काम जनवरी 2025 तक पूरा होना था। जरूरी सुरक्षा मंजूरी नहीं मिलने से काम आगे नहीं बढ़ पाया। समयसीमा बढ़ाए जाने के बाद पुराने ठेकेदार ने परियोजना से हटने का अनुरोध किया था।

एएआई ने इसके बाद नई निविदा प्रक्रिया अपनाकर परियोजना को दोबारा शुरू किया। पहले इसकी अनुमानित लागत लगभग 90.20 करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर 107.98 करोड़ रुपये हो गई है। नई एजेंसी के काम संभालने के साथ एयरपोर्ट के एयरसाइड ढांचे में प्रस्तावित सुधार की प्रक्रिया फिर पटरी पर आई है।

रैपिड एग्जिट टैक्सीवे बनने से उतरने वाले विमान को रनवे से जल्दी बाहर निकलने का रास्ता मिलेगा। पैरेलल टैक्सी ट्रैक विमान को रनवे के समानांतर पार्किंग क्षेत्र की ओर जाने के लिए अलग मार्ग उपलब्ध कराएगा। अभी यह सुविधा नहीं होने के कारण उतरने के बाद विमानों को रनवे के रास्ते ही पार्किंग जोन तक जाना पड़ता है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, इससे प्रत्येक उड़ान में पांच से दस मिनट तक की देरी हो रही है।

दोनों सुविधाएं तैयार होने पर विमान के रनवे पर रहने का समय कम हो सकता है और अगली उड़ान के लिए रनवे जल्द उपलब्ध कराया जा सकेगा। इससे व्यस्त समय में उड़ानों के संचालन की गुंजाइश बढ़ने की उम्मीद है। परिचालन क्षमता बढ़ने पर मौजूदा व्यस्त मार्गों पर अतिरिक्त उड़ानों और नए शहरों के लिए सेवाओं का आधार भी मजबूत हो सकता है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में रांची एयरपोर्ट से करीब 27 लाख यात्रियों का आवागमन दर्ज किया गया था। यहां से दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोलकाता और पुणे जैसे शहरों के लिए बड़ी संख्या में यात्री सफर करते हैं। टैक्सीवे परियोजना के साथ टर्मिनल भवन के पुनर्गठन और अतिरिक्त पार्किंग एप्रन की योजनाएं भी एयरपोर्ट की भविष्य की क्षमता बढ़ाने के प्रस्तावों में शामिल हैं।