रांची में मानसून की बारिश से राजधानी के तीनों प्रमुख जलाशयों—हटिया, कांके और रुक्का डैम—में पर्याप्त पानी जमा हो गया है। इन जलाशयों से शहर के बड़े हिस्से में पेयजल की आपूर्ति होती है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा जलस्तर को देखते हुए अगले मानसून तक पानी की राशनिंग की जरूरत पड़ने की संभावना नहीं है।
मौसम केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार, झारखंड में इस मानसून अब तक 698 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। यह सामान्य से 10 प्रतिशत कम होने के बावजूद सामान्य वर्षा की श्रेणी में है। वहीं, रांची में सामान्य 794.8 मिलीमीटर के मुकाबले 829.1 मिलीमीटर बारिश हुई है, जो सामान्य से चार प्रतिशत अधिक है।
कांके डैम में पानी अधिकतम क्षमता से ऊपर पहुंचने के कारण इस वर्ष तीन बार जरूरत के अनुसार फाटक खोलना पड़ा। 28 अगस्त को यहां जलस्तर 26 फीट सात इंच दर्ज किया गया। संबंधित अधिकारी के मुताबिक डैम के स्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और जल शोधन का काम भी सामान्य रूप से चल रहा है।
हटिया डैम का जलस्तर 28 अगस्त को 33 फीट चार इंच था, जबकि इसकी क्षमता लगभग 38 से 39 फीट बताई गई है। डैम का फाटक खोलने की जरूरत इस वर्ष नहीं पड़ी। सहायक अभियंता के अनुसार, जलाशय में इतनी मात्रा में पानी उपलब्ध है कि अगले मानसून तक राशनिंग की आवश्यकता नहीं होगी।
राजधानी की जलापूर्ति के लिहाज से महत्वपूर्ण रुक्का डैम में भी पर्याप्त भंडारण दर्ज किया गया है। 28 अगस्त को इसका जलस्तर 32 फीट छह इंच था। डैम से जुड़े अधिकारी ने इस स्तर को संतोषजनक बताया है।
जुलाई और अगस्त में हुई बारिश ने तीनों जलाशयों की स्थिति बेहतर की है। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अभियंता और संबंधित अधिकारी जलस्तर पर नजर रख रहे हैं। फिलहाल उपलब्ध आंकड़े राजधानी की आगामी महीनों की पेयजल व्यवस्था के लिए राहत का संकेत देते हैं।