रांची में संचालित निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम और क्लीनिकों को सात दिनों के भीतर इलाज और उपलब्ध सेवाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। सिविल सर्जन सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अमरेंद्र प्रसाद ने चिकित्सा प्रतिष्ठानों के लिए यह निर्देश जारी किया है। इसका उद्देश्य मरीजों को उपचार से पहले जरूरी जानकारी उपलब्ध कराना और स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता तथा जवाबदेही बढ़ाना है।
कार्यालय आदेश संख्या 5236 के अनुसार, प्रत्येक संबंधित संस्थान को अपना वैध और अद्यतन निबंधन प्रमाणपत्र या लाइसेंस प्रमुख स्थान पर लगाना होगा। प्रमाणपत्र ऐसी जगह प्रदर्शित करने को कहा गया है, जहां आने वाले मरीज और उनके परिजन उसे आसानी से देख सकें।
अस्पतालों और क्लीनिकों को वहां सेवा दे रहे डॉक्टरों के नाम तथा उनकी शैक्षणिक योग्यता की जानकारी भी सार्वजनिक करनी होगी। इसके साथ मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण, विशेषज्ञता और परामर्श के निर्धारित समय का विवरण प्रदर्शित करना अनिवार्य किया गया है। इससे मरीजों को संबंधित चिकित्सक और उपलब्ध विशेषज्ञ सेवा के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।
आदेश में अद्यतन और मदवार दर सूची लगाने पर विशेष जोर दिया गया है। इसमें डॉक्टर की परामर्श फीस, अलग-अलग जांचों का शुल्क, चिकित्सा प्रक्रियाओं की लागत, बेड चार्ज और अन्य सेवाओं के लिए ली जाने वाली राशि का स्पष्ट उल्लेख करना होगा। सार्वजनिक दर सूची से मरीज इलाज पर संभावित खर्च का पहले आकलन कर सकेंगे।
चिकित्सा प्रतिष्ठानों को उपलब्ध सेवाओं और सुविधाओं के साथ मरीजों के अधिकारों की जानकारी भी प्रमुख स्थान पर देनी होगी। शिकायत होने पर उसके निवारण की व्यवस्था क्या है और मरीज किस माध्यम से अपनी बात रख सकते हैं, इसका विवरण भी प्रदर्शित करना होगा। निर्देश क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट के प्रावधानों के अनुपालन से संबंधित है।
सिविल सर्जन कार्यालय के मुताबिक, एक सामाजिक कार्यकर्ता के आधिकारिक ई-मेल से प्राप्त अनुरोध के बाद यह आदेश जारी किया गया। संबंधित निरीक्षण अधिकारियों को संस्थानों में निर्देशों के पालन की जांच का दायित्व दिया गया है। निरीक्षण में कमी या उल्लंघन मिलने पर वे सिविल सर्जन को रिपोर्ट सौंपेंगे, जिसके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकेगी।