रांची के मोरहाबादी में 3-4 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, मुख्यमंत्री होंगे शामिल

मोरहाबादी में दो दिवसीय श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के दौरान बच्चों की पोशाक प्रतियोगिता, भजन संध्या, सांस्कृतिक प्रस्तुति और महिला-पुरुष दही हांडी मुकाबले आयोजित होंगे।

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रांची के मोरहाबादी में प्रस्तावित श्रीकृष्ण जन्मोत्सव और दही हांडी आयोजन का सांकेतिक दृश्य

रांची के मोरहाबादी में 3 और 4 सितंबर को दो दिवसीय श्रीकृष्ण जन्मोत्सव आयोजित किया जाएगा। आयोजन समिति के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर उन्हें समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया। समिति के अनुसार मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में शामिल होने पर सहमति दी है।

पहले दिन 3 सितंबर को बाल गोपाल और बाल राधा पोशाक प्रतियोगिता शाम चार बजे से होगी। इसमें छह महीने से 12 वर्ष तक के बच्चे भाग ले सकेंगे। प्रतिभागियों को छह महीने से पांच वर्ष और छह से 12 वर्ष तक के दो आयु वर्गों में रखा गया है। पंजीकरण आयोजन स्थल पर दोपहर तीन बजे से किया जाएगा।

दूसरे दिन 4 सितंबर को मोरहाबादी मैदान में भजन संध्या, श्रीकृष्ण के जीवन पर आधारित नृत्य मंचन और दही हांडी प्रतियोगिता होगी। कार्यक्रम शाम छह बजे आरंभ होगा। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संध्या आरती के लिए 11 ब्राह्मणों की भागीदारी भी तय की गई है। मैदान में विद्युत सज्जा और श्रीकृष्ण का झूलन तैयार करने की योजना है।

दही हांडी मुकाबला महिला और पुरुष, दोनों वर्गों में कराया जाएगा। इसमें 18 वर्ष से अधिक उम्र के प्रतिभागी हिस्सा ले सकेंगे। समिति ने पुरुष वर्ग के लिए हांडी की ऊंचाई 20 फीट और महिला वर्ग के लिए 17 फीट निर्धारित की है। प्रत्येक दल को अपना प्रदर्शन पूरा करने के लिए पांच मिनट मिलेंगे।

दोनों वर्गों में पहले स्थान पर आने वाली टीम को 61 हजार रुपये, दूसरे स्थान पर 41 हजार रुपये और तीसरे स्थान पर 21 हजार रुपये दिए जाएंगे। विजेता टीमों को ट्रॉफी भी प्रदान की जाएगी। आयोजन समिति ने स्पष्ट किया है कि निर्णायक मंडल का फैसला अंतिम होगा और नशे की हालत में पहुंचे किसी प्रतिभागी को मुकाबले में प्रवेश नहीं मिलेगा।

समिति के मुताबिक, 4 सितंबर के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में झारखंड तथा बाहर से आने वाले कलाकार प्रस्तुति देंगे। मुख्यमंत्री को आमंत्रित करने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व समिति के मुख्य संरक्षक राजीव रंजन प्रसाद ने किया। इसमें समिति के अध्यक्ष, संरक्षक, कार्यकारी अध्यक्ष, महासचिव, सचिव और सह-सचिव भी शामिल थे।