रांची, धनबाद और जमशेदपुर में फिर चालू होगा स्काडा नेटवर्क, 2.43 करोड़ की योजना

जेबीवीएनएल ने तीन शहरों में बिजली वितरण की ऑनलाइन निगरानी और नियंत्रण से जुड़े स्काडा संचार नेटवर्क को दुरुस्त करने के लिए सेवा प्रदाता चुनने की प्रक्रिया शुरू की है।

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रांची, धनबाद और जमशेदपुर में स्काडा बिजली संचार नेटवर्क सुधार की योजना

झारखंड के रांची, धनबाद और जमशेदपुर में लंबे समय से बंद पड़ी सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डाटा एक्विजिशन यानी स्काडा प्रणाली को दोबारा चालू करने की तैयारी शुरू हुई है। झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड ने इसके संचार नेटवर्क को दुरुस्त करने के लिए नेटवर्क बैंडविड्थ सेवा प्रदाता के चयन की प्रक्रिया आरंभ की है।

योजना पर करीब 2.43 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। स्काडा व्यवस्था बिजली वितरण प्रणाली की ऑनलाइन निगरानी और नियंत्रण से जुड़ी है। संचार नेटवर्क बहाल होने पर संबंधित केंद्रों को बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर नजर रखने और उसके संचालन को अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलने की उम्मीद है।

प्रस्ताव के तहत रांची, धनबाद और जमशेदपुर के लिए अलग-अलग एमपीएलएस-वीपीएन नेटवर्क तैयार किए जाएंगे। इसका उद्देश्य प्रत्येक सबस्टेशन को उसके लिए निर्धारित नियंत्रण केंद्र से जोड़ना है। नेटवर्क का यह ढांचा तीनों शहरों की स्काडा प्रणाली के बीच जरूरी डाटा संचार उपलब्ध कराएगा।

रांची और जमशेदपुर स्थित नियंत्रण केंद्रों में प्रबंधित एमपीएलएस कनेक्टिविटी देने की योजना भी शामिल है। चयनित सेवा प्रदाता को नेटवर्क की स्थापना और कॉन्फिगरेशन के साथ उसकी निगरानी तथा रखरखाव की जिम्मेदारी निभानी होगी। इससे परियोजना केवल शुरुआती कनेक्शन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि संचालन के दौरान नेटवर्क की देखरेख भी उसी व्यवस्था का हिस्सा होगी।

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, सेवा प्रदाता के चयन से जुड़ी टेंडर प्रक्रिया नवंबर के अंत तक पूरी होने की संभावना है। इसके बाद चुनी गई एजेंसी संचार नेटवर्क को ठीक करने और आवश्यक कनेक्टिविटी स्थापित करने का काम शुरू करेगी। हालांकि, प्रणाली के पूरी तरह चालू होने की निश्चित तारीख अभी सामने नहीं आई है।

स्काडा नेटवर्क की बहाली तीन प्रमुख शहरों की बिजली वितरण व्यवस्था के तकनीकी ढांचे के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। फिलहाल योजना की प्रगति टेंडर प्रक्रिया पूरी होने और एजेंसी के चयन पर निर्भर करेगी। काम शुरू होने के बाद ही नेटवर्क सुधार की समयसीमा और प्रणाली के संचालन की विस्तृत स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।