धनबाद। झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड ने राज्य में बिजली की खरीद और आपूर्ति का अधिक सटीक हिसाब तैयार करने के लिए आधुनिक मीटरिंग व्यवस्था लागू करने की प्रक्रिया शुरू की है। निगम ने सात विद्युत एरिया बोर्ड के 33 केवी इंटरफेस प्वाइंट पर कुल 79 एवरेज बाय टाइम यानी एबीटी मीटर लगाने के लिए टेंडर जारी किया है।
योजना के दायरे में रांची, जमशेदपुर, दुमका, मेदिनीनगर, गिरिडीह, धनबाद और हजारीबाग एरिया बोर्ड आएंगे। चयनित एजेंसी को मीटरों की खरीद, स्थापना और कमीशनिंग करनी होगी। मीटरिंग यूनिट, जरूरी उपकरण और एबीटी सॉफ्टवेयर की आपूर्ति भी इसी काम में शामिल है। एजेंसी पांच वर्षों तक पूरी व्यवस्था के रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेगी।
एबीटी मीटर निर्धारित समय अंतराल पर बिजली के प्रवाह और ऊर्जा की मात्रा दर्ज करते हैं। इससे प्रत्येक इंटरफेस प्वाइंट पर अलग-अलग समय में मिली बिजली का विस्तृत रिकॉर्ड उपलब्ध हो सकेगा। इन आंकड़ों के जरिए बिजली की खरीद और आगे की आपूर्ति से संबंधित हिसाब का मिलान करने तथा दर्ज मात्रा में सामने आने वाले अंतर की जांच करने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
नई व्यवस्था झारखंड ऊर्जा संचरण निगम लिमिटेड, जेबीवीएनएल और दामोदर घाटी निगम के बीच बिजली के आदान-प्रदान का रिकॉर्ड व्यवस्थित करने में भी उपयोगी हो सकती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जेबीवीएनएल धनबाद क्षेत्र में डीवीसी से प्रतिदिन करीब 210 से 230 मेगावाट बिजली लेता है, जबकि पूरे राज्य में यह खरीद करीब 600 मेगावाट बताई गई है।
समय आधारित आंकड़ों के विश्लेषण से अलग-अलग प्वाइंट पर बिजली की आवक और वितरण के रिकॉर्ड में असामान्य अंतर की पहचान की जा सकेगी। इससे संबंधित इंटरफेस प्वाइंट की जांच और तकनीकी नुकसान का आकलन आसान हो सकता है। बिजली खरीद तथा आपूर्ति के आंकड़ों में अंतर मिलने पर उसकी पड़ताल के लिए भी अधिक व्यवस्थित आधार उपलब्ध होगा।
हालांकि, एबीटी मीटर लगने मात्र से लाइन लॉस कम होना सुनिश्चित नहीं है। इसके लिए वितरण नेटवर्क में सुधार, नियमित निगरानी और दूसरे तकनीकी उपाय भी आवश्यक होंगे। प्रस्तावित मीटरिंग व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा लेखांकन को मजबूत करना, उपलब्ध आंकड़ों की तुलना आसान बनाना और बिजली के आदान-प्रदान का अधिक पारदर्शी रिकॉर्ड तैयार करना है।