रांची में आरक्षण सुधार आंदोलन ने रखीं पांच मांगें, पारदर्शिता और समीक्षा पर जोर

आरक्षण सुधार आंदोलन ने रांची में पांच बिंदुओं पर संवैधानिक और कानूनी दायरे में चर्चा की मांग की। संगठन ने कहा कि उद्देश्य अधिकार खत्म करना नहीं, लाभ को जरूरतमंदों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना है।

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रांची में आरक्षण सुधार की मांग उठाते आंदोलन से जुड़े लोग

रांची में आरक्षण सुधार आंदोलन से जुड़े लोगों ने आरक्षण और सामाजिक न्याय की मौजूदा व्यवस्था को लेकर पांच प्रमुख मांगें सामने रखी हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि उनकी पहल का उद्देश्य किसी जाति या समुदाय का अधिकार समाप्त करना नहीं है। वे व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने और उसका लाभ वास्तविक जरूरतमंद लोगों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए व्यापक चर्चा चाहते हैं।

आंदोलन की पहली मांग विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के 2026 के इक्विटी रेगुलेशंस की समीक्षा से जुड़ी है। संगठन ने उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति के आधार पर भेदभाव रोकने के साथ शिकायतों की जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया को निष्पक्ष तथा पारदर्शी बनाने पर जोर दिया है।

दूसरे बिंदु में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के कथित दुरुपयोग को रोकने के लिए आवश्यक संशोधन की मांग की गई। आंदोलनकारियों के अनुसार वास्तविक पीड़ितों को कानून का पूरा संरक्षण मिलना चाहिए, जबकि झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के मामलों में भी निष्पक्ष जांच और तय कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित की जानी चाहिए।

संगठन ने उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में चयन तथा सीट आवंटन के नियमों को पारदर्शी बनाने की मांग भी रखी। इसमें आईआईटी, आईआईएम, मेडिकल कॉलेजों और केंद्रीय व राज्य विश्वविद्यालयों सहित अन्य संस्थानों का उल्लेख किया गया। आंदोलनकारियों ने आरक्षण के साथ शैक्षणिक गुणवत्ता, मेहनत और योग्यता को उचित महत्व देने की बात कही।

चौथी मांग अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आरक्षण में क्रीमी लेयर की व्यवस्था लागू करने पर विचार करने की है। आंदोलन से जुड़े लोगों का तर्क है कि लाभ कुछ लोगों या परिवारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए और समाज के उन वंचित वर्गों तक भी पहुंचना चाहिए जिन्हें अब तक इसका लाभ नहीं मिल सका है।

पांचवें बिंदु में ‘एक परिवार-एक आरक्षण-एक बार’ नीति पर राष्ट्रीय स्तर पर विमर्श की मांग की गई। आंदोलन से जुड़े सुमित दुबे ने कहा कि सभी मुद्दों पर संवैधानिक और कानूनी दायरे में व्यापक चर्चा होनी चाहिए। संगठन ने अपनी मांगों का केंद्र जरूरतमंदों तक लाभ पहुंचाने, परीक्षाओं में पारदर्शिता और सामाजिक न्याय की व्यवस्था को प्रभावी बनाने को बताया है।