रांची में एचईसी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट दोबारा शुरू करने का प्रस्ताव तैयार

एचईसी प्रबंधन ने लंबे समय से बंद एचटीआई को निजी एजेंसी के माध्यम से संचालित करने का प्रस्ताव बनाया है। बोर्ड की मंजूरी के बाद एनसीवीटी संबद्धता बहाल कराने की प्रक्रिया शुरू होगी।

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रांची स्थित एचईसी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के पुनः संचालन से जुड़ी प्रतीकात्मक तस्वीर

रांची में लंबे समय से बंद एचईसी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (एचटीआई) को दोबारा शुरू करने की दिशा में पहल हुई है। एचईसी प्रबंधन ने संस्थान के भवन और संचालन की जिम्मेदारी निजी एजेंसी को देने का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्ताव को अगली बैठक में एचईसी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के सामने रखा जाना है।

बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद प्रबंधन नेशनल काउंसिल फॉर वोकेशनल ट्रेनिंग (एनसीवीटी) से संस्थान की संबद्धता फिर बहाल कराने की प्रक्रिया शुरू करेगा। संबद्धता मिलने के बाद एचटीआई के संचालन के लिए एजेंसी चुनी जाएगी। फिलहाल यह पूरी योजना प्रस्ताव और आवश्यक मंजूरियों के चरण में है।

एचटीआई में पहले इलेक्ट्रिशियन, फिटर, मशीनिस्ट, कोपा और वेल्डर ट्रेड की पढ़ाई होती थी। इलेक्ट्रिशियन, फिटर और मशीनिस्ट के पाठ्यक्रम दो वर्ष के थे, जबकि कोपा और वेल्डर का प्रशिक्षण एक वर्ष में पूरा होता था। दो पालियों में चलने वाले इन पांच ट्रेडों में हर साल करीब 200 युवाओं का नामांकन होता था।

एचईसी की कमजोर आर्थिक स्थिति के बीच वर्ष 2022-23 से संस्थान में नए विद्यार्थियों का नामांकन बंद हो गया था। इसके बाद पहले कोपा और वेल्डर तथा बाद में शेष तीन ट्रेडों की एनसीवीटी संबद्धता समाप्त हो गई। अभी कार्यालय और अभिलेखों की देखरेख के लिए केवल दो कर्मचारी तैनात बताए गए हैं।

संस्थान को फिर सक्रिय करने से पहले परिसर, मशीनों और अन्य संसाधनों की सुरक्षा भी प्रबंधन के सामने महत्वपूर्ण चुनौती होगी। उपलब्ध विवरण के अनुसार परिसर से उपकरण, मशीनों के मोटर, लेथ मशीनों के पुर्जे और ट्रांसफॉर्मर चोरी होने की बातें सामने आई हैं। एचटीआई में 150 से अधिक छोटी-बड़ी मशीनें होने की जानकारी दी गई है।

योजना आगे बढ़ती है तो रांची और झारखंड के युवाओं के लिए राज्य में ही रोजगारपरक तकनीकी प्रशिक्षण का एक विकल्प दोबारा उपलब्ध हो सकता है। प्रस्ताव में संस्थान को मौजूदा औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप विकसित करने की संभावना भी जताई गई है। हालांकि प्रशिक्षण शुरू होने का समय बोर्ड की स्वीकृति, एनसीवीटी संबद्धता और एजेंसी चयन की प्रक्रिया पूरी होने पर निर्भर करेगा।