हजारीबाग के मंगुरा गांव में सुनीता देवी 60 से अधिक महिलाओं को दे रहीं काष्ठ शिल्प प्रशिक्षण

पीएम विश्वकर्मा योजना की लाभुक सुनीता देवी इचाक के मंगुरा गांव में 60 से अधिक महिलाओं को लकड़ी के उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दे रही हैं।

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मंगुरा गांव में महिलाओं को लकड़ी के उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण देतीं सुनीता देवी

हजारीबाग जिले के इचाक स्थित मंगुरा गांव में पीएम विश्वकर्मा योजना की लाभुक सुनीता देवी 60 से अधिक महिलाओं को लकड़ी के उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दे रही हैं। इस पहल का उद्देश्य गांव की महिलाओं को काष्ठ शिल्प का कौशल सिखाकर उनके लिए रोजगार और स्वावलंबन की संभावनाएं तैयार करना है।

सुनीता देवी ने अपने पति दिनेश्वर राणा के साथ मिलकर विश्वकर्मा औद्योगिक स्वावलंबी सहकारी समिति लिमिटेड बनाई है। इसी समिति के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं के प्रशिक्षण और उनके लिए काम के अवसर उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। प्रशिक्षण में अलग-अलग तरह की लकड़ी की वस्तुएं बनाना सिखाया जाता है।

दिनेश्वर राणा के अनुसार, पीएम विश्वकर्मा योजना का लाभ मिलने से इस काम को आगे बढ़ाने में मदद मिली। सुनीता स्वयं लकड़ी के विभिन्न उत्पाद तैयार करती हैं और अब यही हुनर गांव की दूसरी महिलाओं तक पहुंचा रही हैं। इससे प्रशिक्षण लेने वाली महिलाओं को पारंपरिक कारीगरी से जुड़ा व्यावहारिक कौशल मिल रहा है।

तैयार उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। हजारीबाग और अन्य जिलों में मेले आयोजित होने पर सुनीता अपने उत्पादों का स्टॉल लगाती हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उनके बनाए सामान के लिए दिल्ली समेत कई स्थानों से ऑर्डर भी मिलने शुरू हुए हैं।

पीएम विश्वकर्मा योजना की शुरुआत 17 सितंबर 2023 को हुई थी। योजना का उद्देश्य लोहार, सुनार, कुम्हार, बढ़ई और दर्जी जैसे पारंपरिक कारीगरों तथा शिल्पकारों को कौशल प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। मंगुरा में इसका उपयोग महिलाओं को काष्ठ शिल्प से जोड़ने के लिए किया जा रहा है।

गांव में चल रहा प्रशिक्षण स्थानीय स्तर पर कौशल विकास का एक उदाहरण बनकर सामने आया है। सुनीता की पहल से 60 से अधिक महिलाएं लकड़ी का सामान बनाना सीख रही हैं। प्रशिक्षण, सहकारी समिति और मेलों में बिक्री के प्रयासों के जरिए इन महिलाओं को अपने हुनर को आय के अवसर में बदलने का रास्ता मिल रहा है।