रांची में दुर्गा पूजा के दौरान सड़कों पर बनाए गए कई तोरण द्वार प्रशासन के निर्देश के बाद भी नहीं हटाए गए हैं। बांस से बनी ये संरचनाएं शहर के विभिन्न हिस्सों में अब भी मौजूद हैं। इनके कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित होने और आम लोगों को परेशानी होने की बात सामने आई है।
उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने 24 अक्टूबर को तोरण द्वार तत्काल हटाने का आदेश दिया था। इस निर्देश का पालन कराने की जिम्मेदारी एसडीओ, यातायात पुलिस और नगर निगम को दी गई थी। इसके बावजूद कडरू, हरमू, कोकर, मेडिकल चौक, अरगोड़ा, हरमू रोड और मेन रोड सहित कई स्थानों पर द्वार या उनसे जुड़ी संरचनाएं बनी हुई मिलीं।
कुछ जगहों पर तोरण द्वार बनाने में इस्तेमाल लोहे की कील और दूसरी सामग्री सड़क पर बिखरी होने की जानकारी भी मिली है। इससे वाहनों के टायर पंचर होने की शिकायत सामने आई है। बीच सड़क या प्रवेश मार्गों पर बची बांस की संरचनाओं के कारण आवागमन में भी बाधा बनी हुई है।
अरगोड़ा के मुख्य चौक के पास बांस के गेट हटाने का काम चल रहा था, लेकिन द्वारों की संख्या अधिक और कारीगर कम होने से काम की गति धीमी बताई गई। कडरू की मुख्य सड़क से गेट हटा दिया गया है, हालांकि सड़क किनारे छोटे बांस के ढांचे और कॉलोनी के प्रवेश मार्ग पर बना गेट अब भी नहीं हटाया गया था।
जिला प्रशासन ने आदेश का पालन नहीं करने के मामले को गंभीरता से लिया है। संबंधित पूजा समितियों को चिह्नित करने की तैयारी की जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यातायात पुलिस और नगर निगम की टीम मंगलवार से शहर के अलग-अलग इलाकों का निरीक्षण करेगी। निरीक्षण के बाद कार्रवाई की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
उपायुक्त ने स्पष्ट किया है कि तोरण द्वार हटाने का आदेश पहले ही दिया जा चुका है और इसका पालन नहीं होने पर कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन के अनुसार, इन संरचनाओं से यातायात प्रभावित हो रहा है और नागरिकों की परेशानी बनी हुई है। अब निरीक्षण में सामने आने वाली स्थिति के आधार पर संबंधित समितियों के विरुद्ध अगला कदम तय किया जाएगा।