झारखंड के सरकारी स्कूलों में कार्यरत 2,085 व्यावसायिक शिक्षक बकाया मानदेय की मांग को लेकर रांची स्थित झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने भुगतान होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही है और वे रात में भी धरनास्थल पर डटे रहे।
शिक्षकों की प्रमुख मांग लंबित मानदेय का 24 घंटे के भीतर भुगतान करना है। इसके साथ ही वे मानदेय बढ़ाने को लेकर दो वर्ष पहले बनी सहमति को अप्रैल 2025 से लागू करने की मांग कर रहे हैं। धरने के माध्यम से उन्होंने भुगतान में हो रही देरी पर नाराजगी जताई है।
व्यावसायिक शिक्षक संघ के विक्रम कुमार महतो के अनुसार, समग्र शिक्षा और राज्य सरकार की ओर से अलग-अलग नियुक्त शिक्षकों का चार से 12 महीने तक का मानदेय बाकी है। यह अवधि शिक्षकों और उन्हें नियुक्त करने वाली एजेंसियों के अनुसार अलग-अलग बताई गई है।
मामले पर झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने व्यावसायिक शिक्षकों की नियुक्ति से जुड़ी एजेंसियों को 24 घंटे के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया है। परिषद ने गुरुवार को सभी संबंधित एजेंसियों की बैठक भी बुलाई है। बैठक में लंबित भुगतान की स्थिति और आगे की प्रक्रिया पर चर्चा होने की संभावना है।
धरनास्थल पर जेआईटीएम प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक प्रोफेसर योगेश कुमार भी पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शन का समर्थन करते हुए अपनी कंपनी के माध्यम से नियुक्त और धरने में मौजूद शिक्षकों को तीन-तीन हजार रुपये देने की घोषणा की। यह घोषणा नियमित बकाया मानदेय के भुगतान से अलग है।
शिक्षकों ने स्पष्ट किया है कि केवल आश्वासन मिलने से धरना समाप्त नहीं किया जाएगा। अब निगाह परिषद की ओर से बुलाई गई बैठक और संबंधित एजेंसियों द्वारा निर्धारित समय में किए जाने वाले भुगतान पर है। समाचार लिखे जाने तक धरना जारी रहने की जानकारी दी गई थी।