रांची के नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ में मतदाता पंजीकरण और मतदाता सूची पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन गुरुवार को संपन्न हुआ। झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय और केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड ने संयुक्त रूप से इसका आयोजन किया। समापन सत्र में निर्वाचन प्रक्रिया को पारदर्शी, सुलभ और समावेशी बनाने से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।
समारोह में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अशोक आर. पाटिल ने मतदाता पंजीकरण और त्रुटिरहित मतदाता सूची को सार्थक लोकतांत्रिक भागीदारी का आधार बताया। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची नागरिकों को औपचारिक निर्वाचन प्रक्रिया से जोड़ने का प्रमुख माध्यम है। उनके अनुसार, सूची की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पात्र नागरिकों का नाम शामिल करना और अपात्र नामों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत हटाना, दोनों आवश्यक हैं।
प्रो. पाटिल ने मतदाता सूची तैयार करने और संशोधित करने की प्रक्रिया में शुद्धता के साथ सुगमता तथा दक्षता के साथ निष्पक्षता बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने सत्यापन के दौरान उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए जाने को भी महत्वपूर्ण बताया। सम्मेलन में निर्वाचन व्यवस्था की शुचिता और मतदाताओं के समावेशन को परस्पर जुड़ा विषय माना गया।
झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने कहा कि सम्मेलन की उपयोगिता इससे सामने आने वाले शोध, नीतिगत विचारों और संस्थागत सहयोग के आधार पर तय होगी। उन्होंने इन प्रयासों को निर्वाचन प्रणाली अधिक समावेशी, सुलभ और लोकतांत्रिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
सम्मेलन की अंतिम रैपोर्टियर रिपोर्ट का सार भी समापन सत्र में प्रस्तुत किया गया। इसमें निर्वाचन प्राधिकारों, न्यायपालिका, सरकारों, शिक्षण एवं शोध संस्थानों, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों और नागरिक समाज के बीच लगातार समन्वय की आवश्यकता रेखांकित की गई। चर्चा का केंद्र ऐसी निर्वाचन प्रक्रिया विकसित करना रहा, जो तकनीकी रूप से उन्नत होने के साथ नागरिकों के लिए सहज भी हो।
समापन समारोह में अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुबोध कुमार, राज्य प्रशिक्षण नोडल पदाधिकारी देवदास दत्ता और उप निर्वाचन पदाधिकारी डॉ. धीरज कुमार ठाकुर सहित शिक्षाविद्, शोधकर्ता, छात्र-स्वयंसेवक तथा निर्वाचन विभाग के नेशनल लेवल मास्टर ट्रेनर्स उपस्थित रहे। आयोजन का समापन मतदाता सूची को लोकतांत्रिक व्यवस्था का बुनियादी स्तंभ मानते हुए संस्थागत सहयोग बढ़ाने के संदेश के साथ हुआ।