रांची में दो और तीन सितंबर को मतदाता पंजीकरण पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसका उद्घाटन दो सितंबर को सुबह 10 बजे होगा। सम्मेलन में निर्वाचन व्यवस्था और अकादमिक क्षेत्र के विशेषज्ञ मतदाता सूची तैयार करने तथा पंजीकरण की प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार रखेंगे।
इस आयोजन के लिए देश-विदेश के संस्थानों, शोधार्थियों और शिक्षाविदों से शोध-पत्रों के सारांश मांगे गए थे। कुल 230 सारांश प्राप्त हुए, जिनमें मूल्यांकन के बाद 80 का चयन किया गया। आगे की प्रक्रिया पूरी होने पर 57 शोध-पत्र अंतिम रूप से चुने गए हैं। इन्हें सम्मेलन के अलग-अलग तकनीकी सत्रों में विषय के अनुसार प्रस्तुत किया जाएगा।
सम्मेलन का आयोजन झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय और सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड के सहयोग से हो रहा है। आईआईएम रांची, नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ और सेंट जेवियर्स कॉलेज रांची भी इसमें भागीदार हैं। निर्वाचन और उच्च शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अधिकारी तथा शिक्षाविद् कार्यक्रम में शामिल होंगे।
तकनीकी सत्रों में निर्वाचक नामावली प्रबंधन, अंकीकरण, मतदाताओं की समावेशिता और लोकतांत्रिक भागीदारी जैसे विषय रखे जाएंगे। मतदाता पंजीकरण तथा सूची निर्माण से जुड़े प्रशासनिक, कानूनी, सामाजिक, तकनीकी और अकादमिक पक्षों पर भी चर्चा प्रस्तावित है। इसके साथ व्यावहारिक चुनौतियों और बेहतर कार्यप्रणालियों को समझने का प्रयास किया जाएगा।
उद्घाटन सत्र में मतदाता पंजीकरण विषय पर एक पुस्तक और सम्मेलन की स्मारिका का लोकार्पण भी किया जाएगा। आयोजन में सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड के कुलपति प्रो. सारंग मेधेकर, एनयूएसआरएल के कुलपति प्रो. अशोक आर. पाटिल और आईआईएम रांची के निदेशक प्रो. दीपक कुमार श्रीवास्तव सहित अन्य विशेषज्ञों की भागीदारी निर्धारित है।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार के अनुसार, शुद्ध, समावेशी और विश्वसनीय मतदाता सूची लोकतांत्रिक निर्वाचन व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। सम्मेलन का उद्देश्य निर्वाचन प्रबंधन के व्यावहारिक अनुभव और अकादमिक शोध को एक मंच पर लाना है। आयोजकों को उम्मीद है कि शोध-पत्रों और विशेषज्ञों के विचारों से पंजीकरण की चुनौतियों तथा उपयोगी कार्यप्रणालियों की पहचान में सहायता मिलेगी।