झारखंड हाईकोर्ट ने राजधानी रांची में अपराध नियंत्रण और सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े मामलों की निगरानी के लिए सीसीटीवी व्यवस्था दुरुस्त रखने का निर्देश दिया है। अदालत ने सड़कों और प्रमुख चौक-चौराहों पर लगे सभी कैमरों को कार्यशील रखने के साथ उन पुलिस थानों में भी जल्द कैमरे लगाने को कहा है, जहां अभी यह सुविधा उपलब्ध नहीं है।
राज्य सरकार की ओर से दाखिल शपथपत्र के अनुसार, रांची शहर के 17 पुलिस थानों और ओपी में कुल 123 सीसीटीवी कैमरे काम कर रहे हैं। वहीं, आठ थाना और ओपी ऐसे हैं जहां कैमरे नहीं हैं। इनमें पंडरा ओपी, बरियातू, धुर्वा, एयरपोर्ट, हिंदपीढ़ी, विधानसभा, एएचटीयू और साइबर थाना शामिल हैं।
अदालत ने गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक और रांची के वरीय पुलिस अधीक्षक से पूछा है कि इन आठ परिसरों में सीसीटीवी कैमरे कब तक लगाए जाएंगे। अधिकारियों से राज्य में कैमरे लगाने के लिए जारी निविदा की मौजूदा स्थिति बताने को भी कहा गया है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर सीसीटीवी लगाने के संबंध में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से जानकारी मांगी गई है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि कैमरों की अनुपलब्धता से चेन छिनतई जैसी घटनाओं और हादसे के बाद वाहन लेकर भागने वाले चालकों की पहचान में कठिनाई होती है। ऐसे मामलों पर नियंत्रण के लिए शहर की सड़कों और महत्वपूर्ण चौराहों पर निगरानी कैमरों का लगातार चालू रहना आवश्यक बताया गया।
ये निर्देश डोरंडा थाना पुलिस द्वारा एक नाबालिग को कथित रूप से अवैध हिरासत में रखे जाने से संबंधित बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई के दौरान दिए गए। याचिका में दावा किया गया है कि बच्चे को प्राथमिकी दर्ज होने से पहले हिरासत में रखा गया और उसकी उम्र 17 वर्ष होने के दस्तावेज पेश किए जाने के बावजूद उसे 19 वर्ष का बताकर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया। ये आरोप अभी न्यायिक विचाराधीन हैं।
हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से मांगी गई जानकारी के साथ मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को निर्धारित की है। अगली तारीख पर थानों में कैमरे लगाने की समयसीमा, निविदा की स्थिति और निगरानी व्यवस्था से जुड़े अन्य बिंदुओं पर सरकार तथा संबंधित संस्थाओं का पक्ष सामने आने की अपेक्षा है।