रांची विश्वविद्यालय में पीएचडी के नए नियमों को लेकर बुधवार को आदिवासी एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग और अंग्रेजी विभाग के शोधार्थियों ने विश्वविद्यालय परिसर में विरोध जताया। विद्यार्थियों ने कुलपति से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखीं। उनका कहना है कि पुराने नियमों के तहत प्रक्रिया पूरी कर चुके शोधार्थियों की आगे की पढ़ाई नए प्रावधानों के कारण प्रभावित हो रही है।
आदिवासी एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग के शोधार्थियों के सामने शिक्षकों की कमी के कारण शोध-निर्देशक नहीं मिलने की समस्या थी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने ऐसे विद्यार्थियों के लिए मानविकी संकाय के शिक्षकों को गाइड बनाने की व्यवस्था पर काम करने की बात कही है। हालांकि संबंधित शिक्षक के पास निर्धारित सीमा के अनुसार सीट खाली होना और उस विषय में शोध-निर्देशक का पद विज्ञापित होना जरूरी होगा।
विश्वविद्यालय के शोध निदेशक डॉ. परवेज हसन के अनुसार, टीआरएल के शोधार्थियों को मानविकी संकाय के शिक्षकों के निर्देशन में शोध कराने की व्यवस्था को अकादमिक काउंसिल की मंजूरी मिल चुकी है। इस व्यवस्था को नई शिक्षा नीति-2020 में शामिल बहुविषयक अध्ययन के प्रावधान से भी जोड़ा गया है। शोधार्थियों के लिए तय अवधि में पंजीकरण पूरा करना आवश्यक रहेगा।
दूसरी ओर, अंग्रेजी विभाग के करीब 60 शोधार्थियों की आगे की प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। इन विद्यार्थियों का कहना है कि पीएचडी प्रवेश के लिए 2024 में अधिसूचना जारी हुई थी। उन्होंने दिसंबर 2025 में प्रवेश प्रक्रिया के बाद कोर्स वर्क और परीक्षा भी पूरी कर ली, लेकिन अब विश्वविद्यालय नए पीएचडी रेगुलेशन का हवाला दे रहा है।
शोधार्थियों के मुताबिक, प्रत्येक आवेदक ने दो हजार रुपये आवेदन शुल्क और छह हजार रुपये प्रवेश शुल्क जमा किया था। उन्हें आशंका है कि नए नियम लागू होने से उनकी पढ़ाई में लगा समय और पैसा प्रभावित हो सकता है। विद्यार्थियों ने मांग की है कि पुरानी व्यवस्था के तहत प्रवेश लेकर कोर्स वर्क और परीक्षा पूरी करने वालों को उसी नियम के अनुसार पीएचडी जारी रखने दिया जाए।
विश्वविद्यालय में हुए विरोध के दौरान शोधार्थियों ने कुलपति के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए मामले में स्पष्ट निर्णय और समाधान मांगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, टीआरएल शोधार्थियों के लिए वैकल्पिक गाइड की संभावना बनी है, जबकि अंग्रेजी विभाग के विद्यार्थियों की मांग पर विश्वविद्यालय प्रशासन की अंतिम स्थिति अभी सामने नहीं आई है।