रांची समेत 15 शहरों के मास्टर प्लान को ड्रोन सर्वे से अपग्रेड करने की तैयारी

झारखंड के 15 शहरों में मौजूदा बसावट और भावी विस्तार के आधार पर मास्टर प्लान अपडेट करने का प्रस्ताव है। योजना में ड्रोन सर्वे, नए प्लानिंग एरिया और टीओडी जोन शामिल होंगे।

2 मिनट पढ़ें 7 बार पढ़ी गई
रांची समेत झारखंड के शहरों के मास्टर प्लान के लिए प्रस्तावित ड्रोन सर्वे का सांकेतिक दृश्य

रांची समेत झारखंड के 15 शहरों के मास्टर प्लान को नई जमीनी स्थिति के अनुरूप अपग्रेड करने की तैयारी है। प्रस्ताव के तहत ड्रोन से उच्च गुणवत्ता वाला सर्वे कर सड़कों, बस्तियों और अन्य विकास कार्यों का बेस मैप बनाया जाएगा। भावी योजना में अगले 20 से 25 वर्षों के दौरान संभावित शहरी विस्तार को भी ध्यान में रखा जाएगा।

इस काम पर 19.86 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसमें केंद्र की अमृत-2.0 योजना से करीब 13.04 करोड़ रुपये और राज्य योजना मद से लगभग 6.82 करोड़ रुपये दिए जाने हैं। नगर विकास विभाग प्रस्ताव को मंजूरी देकर विकास आयुक्त की स्वीकृति के लिए भेज चुका है। नया मास्टर प्लान तैयार होने तक वर्तमान व्यवस्था लागू रहेगी।

राज्य में 49 शहरी स्थानीय निकाय अधिसूचित हैं। इनमें से 42 निकायों के मास्टर प्लान वर्ष 2017 में सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर बने थे, जबकि रांची का मास्टर प्लान 2015 में सीएडी तकनीक से तैयार किया गया था। इसके बाद शहरों में आबादी, कॉलोनियों, सड़कों, आवासीय क्षेत्रों और व्यावसायिक गतिविधियों का विस्तार हुआ है।

प्रस्ताव में नगर निगम और नगर परिषद की मौजूदा सीमा से पांच किलोमीटर तथा नगर पंचायत की सीमा से चार किलोमीटर तक के आसपास विकसित हो रहे इलाकों को योजना क्षेत्र में शामिल करने की तैयारी है। विभाग का आकलन है कि ये इलाके भविष्य में संबंधित नगर निकाय का हिस्सा बन सकते हैं या वहां नया शहरी निकाय बनाया जा सकता है।

रांची में मास्टर प्लान-2037 की सीमा से बाहर दस किलोमीटर की परिधि तक संभावित प्लानिंग एरिया का आकलन किया गया है। यह प्रस्ताव रांची क्षेत्रीय विकास प्राधिकार के सुझाव के आधार पर तैयार हुआ है। हालांकि क्षेत्र की अंतिम सीमा स्थानीय जरूरत के अनुसार घटाई या बढ़ाई जा सकती है।

अपग्रेडेड मास्टर प्लान में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट यानी टीओडी जोन भी चिह्नित किए जाएंगे। इनमें आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों को जोड़ने, सार्वजनिक परिवहन बढ़ाने तथा दैनिक सुविधाएं पैदल दूरी पर उपलब्ध कराने पर जोर होगा। सड़क की चौड़ाई, पैदल आवागमन और सार्वजनिक परिवहन की उपलब्धता के आधार पर ऐसे क्षेत्रों का चयन प्रस्तावित है।