राजस्थान में नेतृत्व प्रशिक्षण लेकर लौटे झारखंड के 82 सरकारी स्कूलों के प्रधानाध्यापक

विद्यालय प्रबंधन और शिक्षण में नवाचार के लिए झारखंड के 82 प्रधानाध्यापकों ने राजस्थान में आवासीय प्रशिक्षण लिया। इनमें पूर्वी सिंहभूम के 10 प्रतिभागी शामिल थे।

2 मिनट पढ़ें 4 बार पढ़ी गई
झारखंड24 का पूर्ण लोगो—प्रकाशक की लोगो-मात्र छवि के स्थान पर

झारखंड के सरकारी विद्यालयों में प्रबंधन और शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से राज्य के 82 प्रधानाध्यापकों को राजस्थान में नेतृत्व प्रशिक्षण दिया गया। विद्यालय प्रमाणीकरण में गोल्ड श्रेणी प्राप्त स्कूलों से चुने गए इन प्रधानाध्यापकों ने 16 से 23 सितंबर के बीच झुंझुनू जिले के बगड़ स्थित पिरमल स्कूल ऑफ लीडरशिप में आयोजित आवासीय कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

यह प्रशिक्षण स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग और झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के संयुक्त तत्वावधान में कराया गया। प्रतिभागियों की यात्रा और प्रशिक्षण का खर्च परिषद ने वहन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रधानाध्यापकों की आधुनिक नेतृत्व क्षमता विकसित करने के साथ विद्यालय प्रबंधन को मजबूत बनाना और पढ़ाने के तरीकों में नए प्रयोगों को प्रोत्साहित करना था।

प्रशिक्षण के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और बदलते सामाजिक परिवेश में विद्यालयों की भूमिका पर चर्चा की गई। रचनात्मकता, सामाजिक-भावनात्मक एवं नैतिक अधिगम, विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया, नए मूल्यांकन तरीके, विभिन्न प्रकार की बुद्धिमत्ता और सांस्कृतिक विविधता जैसे विषय भी सत्रों में शामिल रहे।

कार्यक्रम में सैद्धांतिक जानकारी के साथ व्यावहारिक अनुभव पर भी जोर दिया गया। प्रधानाध्यापकों ने राजस्थान के स्थानीय विद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों का भ्रमण कर वहां की व्यवस्थाओं, प्रशासनिक प्रयोगों और नेतृत्व के तरीकों का अध्ययन किया। इसका मकसद उपयोगी कार्यप्रणालियों को समझना और झारखंड लौटने के बाद अपने विद्यालयों में उनके प्रयोग की संभावनाएं तलाशना था।

प्रशिक्षण में पूर्वी सिंहभूम के 10 प्रधानाध्यापक और शिक्षक शामिल हुए। प्रतिभागियों में बहरागोड़ा, बर्मामाइंस, ज्वालकाता, केशरदा, जयपुरा, गोबराघुसी, बाधुरिया, गुड़ाबांदा, मधाबपुर और धालभूमगढ़ के सरकारी विद्यालयों के प्रतिनिधि थे। इस भागीदारी से जिले के अलग-अलग क्षेत्रों के विद्यालयों तक प्रशिक्षण में सीखी गई प्रबंधन और शिक्षण संबंधी कार्यप्रणालियां पहुंच सकती हैं।

अब प्रशिक्षण का व्यावहारिक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रधानाध्यापक अपने विद्यालयों की जरूरतों के अनुसार सीखी गई विधियों का उपयोग कैसे करते हैं। पहल का घोषित फोकस विद्यालयों में प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर करना, शैक्षणिक वातावरण को अधिक प्रभावी बनाना और विद्यार्थियों को केंद्र में रखकर स्कूल नेतृत्व विकसित करना है।