रामगढ़ जिले के चार गांवों में खेती को तकनीक आधारित और जलवायु के अनुकूल बनाने के लिए उन्नत कृषि परियोजना शुरू की जाएगी। इसके तहत ड्रोन, स्मार्ट सिंचाई और डिजिटल कृषि जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। परियोजना पतरातू प्रखंड की बिचा पंचायत में लागू होगी और इससे करीब 100 किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की बात कही गई है।
परियोजना के संचालन के लिए सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड और निधि समृद्धि फाउंडेशन के बीच 29 अक्टूबर को रांची स्थित मुख्यालय में समझौता हुआ। कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व के अंतर्गत प्रस्तावित यह पहल वित्तीय वर्ष 2026-27 और 2027-28 तक संचालित की जाएगी।
इसके दायरे में बिचा, लेम, सुथारपुर और सालगो गांवों को रखा गया है। योजना का उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों से जोड़ने के साथ बदलते मौसम से पैदा होने वाली चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाना है। इसके लिए खेतों और स्थानीय परिस्थितियों से जुड़े आंकड़ों के आधार पर कृषि संबंधी निर्णय लेने में सहायता दी जाएगी।
परियोजना में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी तथा इंटरनेट ऑफ थिंग्स पर आधारित सटीक खेती को बढ़ावा देने की योजना है। किसानों के लिए मिट्टी की उन्नत जांच, स्थानीय मौसम की निगरानी और तकनीक आधारित कृषि सलाह उपलब्ध कराई जाएगी। इससे खेती में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
चयनित गांवों के खेतों में तकनीक-सक्षम सिंचाई प्रणाली लागू की जाएगी। इसके साथ ही कृषि कार्यों में ड्रोन आधारित सेवाओं का उपयोग भी प्रस्तावित है। परियोजना का जोर किसानों तक वास्तविक समय के आंकड़े पहुंचाने पर रहेगा, ताकि वे मिट्टी, मौसम और खेत की जरूरतों को ध्यान में रखकर फैसले कर सकें।
तकनीकी सुविधाओं के अलावा किसानों की क्षमता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम और शैक्षणिक भ्रमण भी आयोजित किए जाएंगे। इन गतिविधियों में आधुनिक कृषि पद्धतियों, संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और बदलते मौसम के अनुरूप खेती करने की जानकारी दी जाएगी। इस तरह परियोजना में उपकरण उपलब्ध कराने के साथ उनके व्यावहारिक उपयोग की समझ विकसित करने की भी योजना है।