झारखंड में टैरिफ याचिका की समय सीमा 30 नवंबर, देरी पर बिजली कंपनियों पर जुर्माने का प्रावधान

विद्युत नियामक आयोग ने उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण कंपनियों के लिए समय पर टैरिफ याचिका देना अनिवार्य किया है। उल्लंघन पर पक्ष सुनने के बाद जुर्माना लगाया जा सकेगा।

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रांची में झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग से जुड़ी टैरिफ निर्धारण प्रक्रिया का सांकेतिक दृश्य

रांची में झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग ने बिजली कंपनियों के लिए टैरिफ याचिका दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 नवंबर निर्धारित की है। नया प्रावधान राज्य की बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण कंपनियों पर लागू होगा। तय अवधि में याचिका जमा नहीं करने वाली कंपनी के खिलाफ आयोग जुर्माना लगाने पर विचार कर सकेगा।

आयोग ने टैरिफ निर्धारण से जुड़े नियमों में संशोधन करते हुए समय सीमा का पालन अनिवार्य बनाया है। इसके लिए अधिसूचना भी प्रकाशित कर दी गई है। जुर्माने की कोई एक निश्चित राशि तय नहीं की गई है; मामले की परिस्थितियों के आधार पर आयोग अर्थदंड निर्धारित करेगा।

कार्रवाई से पहले संबंधित बिजली कंपनी को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। देरी की स्थिति में जुर्माने के साथ कंपनी की कैरिंग कॉस्ट को अस्वीकार करने का विकल्प भी आयोग के पास रहेगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य टैरिफ निर्धारण की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और सहज बनाना बताया गया है।

टैरिफ याचिका बिजली कंपनियों के राजस्व, परिचालन खर्च और उपभोक्ताओं से वसूली जाने वाली बिजली दरों के निर्धारण की अहम प्रक्रिया है। याचिका मिलने के बाद आयोग कंपनी के वित्तीय और परिचालन मामलों का अध्ययन करता है। इसी समीक्षा के आधार पर टैरिफ तय करने की आगे की प्रक्रिया चलती है।

नए प्रावधान को लागू करने के लिए उत्पादन टैरिफ, ट्रांसमिशन टैरिफ और वितरण टैरिफ निर्धारित करने वाली नियमावलियों में बदलाव किया गया है। स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर की शुल्क वसूली से संबंधित नियमावली को भी संशोधन के दायरे में रखा गया है।

कैरिंग कॉस्ट उस ब्याज खर्च से जुड़ी होती है, जो बिजली खरीद की वास्तविक लागत और उस समय लागू बिल दर के बीच अंतर होने पर कंपनी द्वारा लिए गए ऋण पर आता है। सामान्य प्रक्रिया में आयोग बाद में बिजली दरों के माध्यम से इसकी वसूली की अनुमति दे सकता है। अब समय पर टैरिफ याचिका नहीं देने पर ऐसी लागत की स्वीकृति भी प्रभावित हो सकती है।