रामगढ़ में लागू होगा मुजफ्फरपुर का महिला बैग क्लस्टर मॉडल

झारखंड सरकार की तीन सदस्यीय टीम ने मुजफ्फरपुर के बैग क्लस्टर का अध्ययन किया। इसी मॉडल पर रामगढ़ में बैग कंपनी शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

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रामगढ़ में महिलाओं को बैग निर्माण से जोड़ने के लिए मुजफ्फरपुर का बैग क्लस्टर मॉडल लागू करने की तैयारी है। इस सिलसिले में झारखंड सरकार की तीन सदस्यीय टीम ने शुक्रवार को मुजफ्फरपुर पहुंचकर बेला स्थित क्लस्टर की कार्यप्रणाली देखी। टीम ने महिलाओं द्वारा संचालित उत्पादन व्यवस्था और उससे जुड़ी गतिविधियों की जानकारी ली।

दौरे के दौरान टीम ने बैग बनाने की प्रक्रिया को अलग-अलग चरणों में समझा। इसमें सामग्री की कटिंग, बैग निर्माण, तैयार उत्पादों की पैकेजिंग और उनकी मार्केटिंग शामिल थी। अध्ययन का उद्देश्य मुजफ्फरपुर में चल रही व्यवस्था को समझकर रामगढ़ की परिस्थितियों के अनुरूप ऐसा ही मॉडल विकसित करना है।

रामगढ़ की जिला कार्यक्रम प्रबंधक रीता सिंह ने टीम का नेतृत्व किया। उन्होंने बताया कि सरकारी योजनाओं के साथ समन्वय करते हुए जीविका से जुड़ी महिलाएं आत्मनिर्भरता की दिशा में काम कर रही हैं। इसी अनुभव से प्रेरणा लेकर रामगढ़ में भी महिलाओं की बैग कंपनी शुरू करने की प्रक्रिया आरंभ की जा रही है।

टीम में ऋषि राज और अजय कुमार भी शामिल थे। सदस्यों ने महिला समूहों की विभिन्न क्षेत्रों में चल रही गतिविधियों को देखा और उनके कामकाज के बारे में जानकारी जुटाई। मुजफ्फरपुर की जीविका जिला कार्यक्रम प्रबंधक अनीशा ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया तथा जिले में संचालित प्रमुख कार्यक्रमों से अवगत कराया।

बैग क्लस्टर के अतिरिक्त प्रतिनिधिमंडल ने सदर अस्पताल में संचालित दीदी की रसोई का भी जायजा लिया। यहां मरीजों को उपलब्ध कराए जा रहे भोजन, कैंटीन के संचालन और सेवा व्यवस्था के बारे में जानकारी ली गई। टीम ने जीविका हेल्थ हेल्प डेस्क पर कार्यरत महिला से बातचीत कर मरीजों को दी जाने वाली सुविधाओं को भी समझा।

रामगढ़ में प्रस्तावित पहल अभी प्रक्रिया के स्तर पर है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मुजफ्फरपुर के अनुभव से उत्पादन, पैकेजिंग और विपणन की व्यावहारिक व्यवस्था समझी गई है। बैग कंपनी शुरू होने पर स्थानीय महिलाओं को संगठित तरीके से हुनर और आजीविका से जोड़ने का आधार तैयार हो सकता है, हालांकि इसके क्रियान्वयन का विस्तृत कार्यक्रम अभी सामने नहीं आया है।