सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल स्थित धातकीडीह गांव में रूपी सोरेन के निधन की खबर के बाद शोक का माहौल है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां और झारखंड आंदोलन के नेता रहे शिबू सोरेन की पत्नी रूपी सोरेन का इस गांव से पारिवारिक जुड़ाव था। धातकीडीह उनका मायका होने के साथ मुख्यमंत्री का ननिहाल भी है।
गांव में रहने वाले उनके भाइयों चारुचंद किस्कू और गुरुचरण किस्कू समेत परिवार के अन्य सदस्य इस निधन से शोकाकुल हैं। त्योहारों तथा पारिवारिक अनुष्ठानों के अवसर पर रूपी सोरेन का धातकीडीह आना-जाना रहा था। इस कारण उनके निधन की सूचना ने गांव से जुड़े परिजनों और परिचितों को भी प्रभावित किया है।
रूपी सोरेन का विवाह एक जनवरी 1962 को शिबू सोरेन से हुआ था। झारखंड आंदोलन और वंचित समुदायों के अधिकारों को लेकर शिबू सोरेन के लंबे सार्वजनिक संघर्ष के दौरान परिवार की जिम्मेदारियां मुख्य रूप से रूपी सोरेन ने संभालीं। आंदोलन के क्रम में शिबू सोरेन को कई बार गांवों और जंगलों में रहना पड़ा तथा जेल भी जाना पड़ा था।
ऐसी परिस्थितियों में रूपी सोरेन ने अपने बच्चों दुर्गा सोरेन, अंजली, हेमंत सोरेन और बसंत सोरेन की परवरिश तथा शिक्षा की जिम्मेदारी निभाई। परिवार में उनकी भूमिका को संकट के समय स्थिरता और संबल देने वाली महिला के रूप में याद किया जा रहा है।
वर्ष 2009 में बड़े बेटे दुर्गा सोरेन के निधन से उन्हें व्यक्तिगत आघात लगा था। वर्ष 2025 में पति शिबू सोरेन का भी निधन हो गया। इन पारिवारिक क्षतियों के बावजूद वह परिवार और अपने पैतृक गांव से जुड़ी रहीं।
वर्ष 2026 में शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण दिए जाने पर रूपी सोरेन ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से सम्मान ग्रहण किया था। अब उनके निधन के बाद धातकीडीह में उनके पारिवारिक जीवन, सादगी और कठिन दौर में निभाई गई जिम्मेदारियों को याद किया जा रहा है।