लातेहार के बेतला राष्ट्रीय उद्यान में पर्यटक अब बंदरों या किसी अन्य वन्यजीव को भोजन नहीं दे सकेंगे। पलामू टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाते हुए कहा है कि नियम का उल्लंघन करने वालों पर आर्थिक जुर्माना लगाया जाएगा और वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
पलामू टाइगर रिजर्व के उप निदेशक प्रजेश कांत जेना ने पर्यटकों की सुरक्षा और वन्यजीवों के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए ये निर्देश जारी किए हैं। प्रबंधन के अनुसार, उद्यान आने वाले कुछ लोग बंदरों को जंक फूड, फास्ट फूड तथा दूसरी बाहरी खाद्य सामग्री देते हैं। इससे जानवरों की प्राकृतिक भोजन संबंधी आदतें प्रभावित हो रही हैं।
पार्क अधिकारियों का कहना है कि मनुष्यों से लगातार भोजन मिलने के कारण कई बंदर पर्यटकों के काफी करीब पहुंचने लगे हैं। भोजन पाने के लिए सामान छीनने और भ्रमणकारियों को परेशान करने की घटनाएं भी सामने आई हैं। प्रबंधन ने बंदरों के व्यवहार में आक्रामकता बढ़ने को भी इसी समस्या से जोड़ा है।
वन विभाग की टीम ने हाल में राष्ट्रीय उद्यान और आसपास के क्षेत्रों से 50 से अधिक आक्रामक बंदरों को पकड़ा है। विभाग के मुताबिक, इन बंदरों को पर्यटक क्षेत्रों और घनी आबादी से दूर पलामू टाइगर रिजर्व के प्राकृतिक जंगलों में छोड़ा गया। इस अभियान का उद्देश्य उन्हें उनके स्वाभाविक परिवेश में लौटाना और लोगों से अनावश्यक संपर्क घटाना है।
प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार में किसी तरह का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। किसी जंगली जानवर को खाने की वस्तु देना भी प्रतिबंधित गतिविधि माना जाएगा। ऐसा करते पकड़े गए व्यक्ति के विरुद्ध लागू वन्यजीव कानून के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
वन विभाग ने बेतला आने वाले पर्यटकों से जानवरों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने और उद्यान के सभी सुरक्षा नियमों का पालन करने की अपील की है। अधिकारियों के अनुसार, भोजन नहीं देने से पर्यटकों की सुरक्षा बेहतर होगी और वन्यजीवों की प्राकृतिक खान-पान की आदत तथा व्यवहार बनाए रखने में मदद मिलेगी।