लोहरदगा जिले में साइबर ठगी के करीब 30 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें एटीएम कार्ड बदलकर खाते से पैसे निकालने, मोबाइल पर संदेश भेजकर ठगी करने और सोशल मीडिया के इस्तेमाल से लोगों को निशाना बनाने की घटनाएं शामिल हैं। जिले में डिजिटल अरेस्ट का कोई मामला सामने नहीं आया है।
दर्ज मामलों में कुछ पीड़ितों की रकम बैंकों के माध्यम से वापस कराई गई है। हालांकि, कई मामलों की जांच अभी चल रही है और संबंधित पीड़ित अपनी राशि लौटने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। रिपोर्ट में किसी एक मामले में वापस कराई गई रकम या लंबित राशि का अलग-अलग विवरण नहीं दिया गया है।
साइबर अपराधियों द्वारा बैंक अधिकारी बनकर संपर्क करने और केवाईसी अपडेट के नाम पर लोगों को झांसे में लेने की बात भी सामने आई है। ऐसे मामलों में खातों से राशि निकलने के बाद पीड़ित बैंक और पुलिस के पास शिकायत दर्ज करा रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, ठगी का पता चलते ही शिकायत करने और संबंधित बैंक खाते में रकम को समय रहते फ्रीज कराने पर राशि वापस मिलने की संभावना रहती है। रकम वापसी का फैसला मामले की परिस्थितियों, लागू नियमों और बैंक के स्तर पर संभावित लापरवाही जैसे तथ्यों पर निर्भर करता है।
संदिग्ध लेनदेन की पहचान और निगरानी में बैंकों की जवाबदेही को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद पीड़ितों में न्याय तथा मुआवजे की उम्मीद बढ़ी है। साथ ही, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है।
लोहरदगा में दर्ज मामलों की स्थिति बताती है कि साइबर ठगी अलग-अलग तरीकों से की जा रही है। फिलहाल कुछ मामलों में राशि लौटने की सूचना है, जबकि शेष मामलों में जांच और रकम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार है।