वन अधिकार पट्टे की मांग पर लातेहार डीएफओ कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरना

झारखंड जन अधिकार महासभा के बैनर तले ग्रामीणों ने वन अधिकार पट्टे की मांग को लेकर लातेहार डीएफओ कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया।

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लातेहार डीएफओ कार्यालय के सामने वन अधिकार पट्टे की मांग को लेकर धरने पर बैठे ग्रामीण

लातेहार में वन अधिकार पट्टे की मांग को लेकर बड़ी संख्या में ग्रामीण मंगलवार को डीएफओ कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए। प्रदर्शन झारखंड जन अधिकार महासभा के बैनर तले हो रहा है। आंदोलनकारियों का कहना है कि पट्टा मिलने तक वे धरना समाप्त नहीं करेंगे और लंबे समय तक रुकने की तैयारी के साथ आए हैं।

धरने का नेतृत्व महासभा के संयोजक नंदकिशोर गंझू और सेल्सटिन कुजूर तथा प्रवक्ता जॉर्ज मोनी पल्ली उर्फ धोती फादर कर रहे हैं। संगठन के प्रतिनिधियों के अनुसार, वन अधिकार पट्टे की मांग वर्ष 2010 से लंबित है। उनका दावा है कि इस विषय पर पहले भी कई प्रदर्शन हुए, लेकिन उन्हें आश्वासन के अलावा ठोस नतीजा नहीं मिला।

सेल्सटिन कुजूर ने बताया कि करीब एक वर्ष पहले भी अनिश्चितकालीन धरना दिया गया था। उस समय पट्टा उपलब्ध कराने का आश्वासन मिलने के बाद आंदोलन समाप्त किया गया, लेकिन एक साल गुजरने के बावजूद मांग पूरी नहीं हुई। आंदोलनकारियों ने इस बार केवल आश्वासन के आधार पर लौटने से इनकार किया है।

महासभा के प्रवक्ता ने दो से तीन हजार मामले लंबित होने का दावा करते हुए उनके निष्पादन की मांग की। धरने में शामिल ग्रामीणों का कहना है कि जंगल क्षेत्र में रहने के बावजूद उन्हें अधिकार पत्र नहीं मिला है। महिलाओं और पुरुषों ने प्रदर्शन में भाग लिया तथा अपने साथ भोजन बनाने के बर्तन और ठहरने का सामान भी लाया।

ग्रामीण सुबह करीब नौ से दस बजे के बाद वाहनों से धरनास्थल पहुंचने लगे। इसकी जानकारी मिलने पर जिला प्रशासन ने संगठन के संयोजकों और प्रवक्ताओं को बातचीत के लिए बुलाया। प्रशासन की ओर से कहा गया कि धरने की अनुमति नहीं ली गई है, इसलिए टेंट नहीं लगाया जाए। इसके बाद कुछ समय के लिए टेंट लगाने का काम रोक दिया गया।

करीब दो से तीन घंटे तक चली बातचीत के बावजूद कोई सहमति नहीं बन सकी। आंदोलनकारियों ने एकजुट होकर प्रदर्शन जारी रखने का निर्णय लिया। धरनास्थल पर मुनेश्वर उरांव, हरिकुमार भगत, संतोष उरांव, रामेश्वर उरांव, राजू उरांव और प्रवेश राणा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। प्रशासन की ओर से वन पट्टा मामलों के निपटारे की कोई नई समयसीमा सामने नहीं आई है।