रांची में राज्य के वित्त, योजना एवं विकास, वाणिज्य-कर तथा संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने विधायकों के विशेषाधिकार का दायरा बढ़ाने की मांग उठाई है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर कार्य संचालन नियमावली में आवश्यक प्रावधान करने का अनुरोध किया है। प्रस्ताव का उद्देश्य जनप्रतिनिधियों और सरकारी अधिकारियों के बीच व्यवहार तथा जवाबदेही से जुड़े मामलों को नियमों के दायरे में लाना है।
पत्र में मांग की गई है कि किसी अधिकारी द्वारा विधायक के साथ अशिष्ट व्यवहार करने, उसके पत्र की अनदेखी करने या जनहित से जुड़े मामले को जानबूझकर टालने जैसी स्थिति को भी विशेषाधिकार हनन की श्रेणी में रखा जाए। मंत्री का मत है कि विधायकों के विशेषाधिकार को केवल सदन की कार्यवाही तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए।
राधाकृष्ण किशोर के अनुसार, विधायकों के पत्रों का समय पर उत्तर नहीं मिलना, अधिकारियों का फोन नहीं उठाना और जनहित से जुड़े सुझावों पर ध्यान नहीं देना आम शिकायतें बन गई हैं। सरकार की ओर से समय-समय पर निर्देश दिए जाने के बावजूद अधिकारियों के व्यवहार में अपेक्षित सुधार नहीं होने की बात भी पत्र में उठाई गई है।
मंत्री ने कहा है कि निर्वाचित प्रतिनिधि जनता की समस्याओं और आवश्यकताओं को सरकार तथा प्रशासन तक पहुंचाते हैं। इसलिए उनके पत्रों और सुझावों पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। प्रस्तावित प्रावधान के तहत अपमानजनक व्यवहार, अशिष्ट भाषा या जनहित के काम को जानबूझकर लंबित रखने जैसे आचरण पर विशेषाधिकार संबंधी प्रक्रिया अपनाने की व्यवस्था मांगी गई है।
इस प्रस्ताव में जनप्रतिनिधियों के आचरण को भी जवाबदेही से बाहर नहीं रखा गया है। मंत्री ने सुझाव दिया है कि यदि कोई जनप्रतिनिधि किसी अधिकारी के साथ अभद्रता या दुर्व्यवहार करता है, तो उसके विरुद्ध भी नियमों के अनुसार सख्त कार्रवाई का प्रावधान होना चाहिए। उनके मुताबिक, इससे व्यवस्था एकतरफा नहीं रहेगी और दोनों पक्षों के बीच परस्पर सम्मान बढ़ेगा।
विधानसभा के सदस्यों को सदन में स्वतंत्र रूप से काम करने और दायित्व निभाने के लिए कुछ विशेष अधिकार प्राप्त हैं। कार्यवाही या समितियों के काम में अनावश्यक हस्तक्षेप और सदन अथवा उसके सदस्यों की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला आचरण विशेषाधिकार का विषय बन सकता है। अब कार्य संचालन नियमावली में संशोधन और प्रस्तावित दायरे पर आगे का निर्णय विधानसभा स्तर पर होना है।